पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 79 साल की उम्र में करीब 950 किलोमीटर की पदयात्रा की तैयारी में जुट गए हैं। 20 अक्टूबर, विजयादशमी से वे उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू करेंगे। यात्रा से पहले उन्होंने पैदल चलने की प्रैक्टिस शुरू कर दी है और इन दिनों हर दिन करीब 8 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। यात्रा मध्यप्रदेश के उज्जैन से शुरू होकर आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, गुना और टीकमगढ़ होते हुए ओरछा से उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और अयोध्या पहुंचेगी। दिग्विजय सिंह ने यात्रा को गैर-राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि इसमें किसी राजनीतिक दल के झंडे या बैनर नहीं होंगे। उनके मुताबिक यात्रा का उद्देश्य धर्म और आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की मांग उठाना है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर भी वे सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि वे अयोध्या पहुंचकर दान का हिसाब मांगेंगे और इस मामले में याचिका भी दायर करेंगे।
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8 किमी रोज...सामने 950 किमी की मंजिल
यात्रा शुरू होने में एक महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में दिग्विजय ने लंबी पदयात्रा के लिए रोजाना पैदल चलने का अभ्यास शुरू किया है। वे फिलहाल 8 किलोमीटर प्रतिदिन चल रहे हैं। वहीं प्रस्तावित यात्रा में रोज करीब 15 किलोमीटर चलने की योजना है। यात्रा में सुबह करीब 8 बजे चलना शुरू होगा और पहले चरण में 9 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। दोपहर में भोजन और आराम के बाद शाम को करीब 6 किलोमीटर और चलने की योजना है। इस तरह रोज लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने का कार्यक्रम बनाया गया है। यात्रा 65 से 70 दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया हैं।
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दो से तीन हजार लोगों के साथ चलने की तैयारी
यात्रा में शामिल होने के लिए दिग्विजय सिंह के कार्यालय की ओर से गूगल फॉर्म जारी किया गया है। इसमें अब तक करीब 850 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। हालांकि यात्रा की तैयारियां दो से तीन हजार लोगों को ध्यान में रखकर की जा रही हैं। यात्रा का एमपी में रूट उज्जैन से शुरू होकर आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, गुना और टीकमगढ़ से होकर जाएगा। इसके बाद ओरछा होते हुए यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और अयोध्या पहुंचेगी।
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दशहरे से ही शुरुआत क्यों?
दिग्विजय सिंह ने अपनी पिछली नर्मदा परिक्रमा भी दशहरे के दिन 30 सितंबर 2017 से शुरू की थी। इसी वजह से उन्होंने इस बार भी विजयादशमी के दिन यात्रा शुरू करने का फैसला किया है। 20 अक्टूबर को उज्जैन से यात्रा की शुरुआत होगी। इस यात्रा के जरिए वे राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाने के साथ धर्म के क्षेत्र में पारदर्शिता की मांग करेंगे।
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70 की उम्र में नर्मदा परिक्रमा, अब 79 में अयोध्या तक पदयात्रा
दिग्विजय सिंह ने 70 वर्ष की उम्र में पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा की थी। वर्ष 2017-18 में चली यह यात्रा करीब 3,300 किलोमीटर की थी और 193 दिन में पूरी हुई थी। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से करीब 110 क्षेत्रों से होकर यात्रा की थी। नर्मदा परिक्रमा के बाद 2018 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस ने 15 साल बाद सरकार बनाई। हालांकि नर्मदा परिक्रमा को कांग्रेस की सत्ता वापसी का कारण नहीं कहा जा सकता, लेकिन दिग्विजय के राजनीतिक रूप से फिर सक्रिय होने के दौर के लिहाज से यह यात्रा महत्वपूर्ण रही।
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2003 के बाद 10 साल तक नहीं लड़ा चुनाव
1993 से 2003 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह के राजनीतिक सफर में यात्राओं और चुनावी राजनीति के बीच एक और महत्वपूर्ण कड़ी रही है। 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सत्ता जाने के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ने का संकल्प लिया था।