राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश कोगजे को स्मृति चिन्ह भेंट कर विदाई दी
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2016 में गुजरात हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बनें
वकालत के दौरान जस्टिस कोगजे ने सरकारी पक्ष से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। वर्ष 2001 में उन्हें असिस्टेंट गवर्नमेंट प्लीडर नियुक्त किया गया। इसके अगले वर्ष वे एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बने। 2007 तक उन्होंने इन जिम्मेदारियों को निभाया। इसके बाद 2008 में वे सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम्स विभाग के स्टैंडिंग काउंसिल नियुक्त हुए। कानून के क्षेत्र में लंबे अनुभव के बाद अप्रैल 2016 को उन्हें गुजरात हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया। 15 मार्च 2018 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। गुजरात हाईकोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सिविल सर्विस, राजस्व कानून, अप्रत्यक्ष कराधान और अवमानना सहित कई महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े मामलों की सुनवाई की।
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गोधरा दंगा मामलों में रहे विशेष लोक अभियोजक
जस्टिस कोगजे के करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगा मामलों से भी जुड़ा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जून 2011 को उन्हें इन मामलों से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों और अपीलों के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया था। इस भूमिका में उन्होंने गोधरा कांड के बाद हुई हिंसा से जुड़े कई महत्वपूर्ण आपराधिक और अपीलीय मामलों में पैरवी की। यही अनुभव उनके कानूनी करियर के महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल रहा।
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले इलाहाबाद भेजने की थी सिफारिश
जस्टिस कोगजे के करियर में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम वर्ष 2023 का है। अगस्त 2023 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उन्हें बेहतर न्यायिक प्रशासन के लिए गुजरात हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। हालांकि इस स्थानांतरण की अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण वे गुजरात हाईकोर्ट में ही बने रहे और वहां वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल रहे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 31 अगस्त 2026 को उन्हें सीधे मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद 10 सितंबर को उन्होंने पद की शपथ ले ली।