मध्यप्रदेश की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या सिंह के लगातार तबादलों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 सितंबर की तबादला सूची के बाद नेहा मारव्या ने आईएएस अधिकारियों के सोशल मीडिया ग्रुप में अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा पद पर ज्वाइन करने के महज 50 दिन बाद ही उनका तबादला कर दिया गया और पिछले एक साल में यह चौथी बार है, जब उनका नाम ट्रांसफर लिस्ट में आया है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर नेहा मारव्या के लगातार तबादलों की जांच कराने की मांग की है। बरैया का आरोप है कि नेहा ने जहां-जहां काम किया, वहां भ्रष्टाचार के मामलों में सख्ती दिखाई और इसी वजह से उन्हें बार-बार हटाया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर एक साल में चार तबादलों के पीछे कौन अधिकारी या कौन-सी व्यवस्था काम कर रही है?
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बेलवाल की जांच से शुरू हुआ विवाद?
नेहा मारव्या का नाम इससे पहले पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े मामले में सामने आया था। उन्होंने तत्कालीन अपर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के तौर पर ललित मोहन बेलवाल के कार्यकाल से संबंधित शिकायतों की जांच की थी। उनकी जांच रिपोर्ट में वर्ष 2015 से 2023 के बीच कथित तौर पर पद के दुरुपयोग और सलाहकारों की नियुक्तियों में अनियमितताओं से जुड़े बिंदु सामने आए थे। बाद में इसी मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू ने बेलवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। शिकायत के साथ नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि बेलवाल को पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस का करीबी बताया जाता रहा है। बरैया ने अपने पत्र में इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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14 साल बाद मिली कलेक्टरी, आठ महीने में खत्म
नेहा मारव्या 2011 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। लंबे समय तक फील्ड पोस्टिंग से दूर रहने के बाद जनवरी 2025 में उन्हें पहली बार डिंडोरी का कलेक्टर बनाया गया था। लेकिन कलेक्टर के रूप में उनका कार्यकाल आठ महीने के आसपास ही रहा। सितंबर 2025 में हुए प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें डिंडोरी कलेक्टर पद से हटाकर विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति मेंजिम्मेदारी दी गई। इसके बाद उनको आदिम जाति कल्याण विभाग में पोस्टिंग दी गई। अब सितंबर 2026 की तबादला सूची में उनका नाम फिर आया है। 2011 बैच की आईएएस नेहा मारव्या सिंह को आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाओं के संचालक पद से हटा दिया गया है। उनके पास मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार था। अब उन्हें मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम का प्रबंध संचालक बना दिया गया है। इस बार उन्होंने खुद आईएएस अधिकारियों के सोशल मीडिया ग्रुप में लगातार तबादलों को लेकर सवाल उठाए हैं।
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‘शिकायत की, कार्रवाई की जगह मेरा ही ट्रांसफर’
नेहा मारव्या ने आईएएस अधिकारियों के एसोसिएशन ग्रुप में लिखा कि वह 5 सितंबर की तबादला सूची में अपना नाम देखकर बेहद विचलित हैं। उनका कहना है कि 50 दिन में ही उनका तबादला कर दिया गया और एक साल में यह चौथी बार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे कर्मचारी, जिनकी स्थापना उनके अधीन नहीं बल्कि विभाग के पास थी, उनके खिलाफ बगावत जैसे हालात पैदा कर रहे थे। उनके मुताबिक कुछ कर्मचारियों ने मेज थपथपाकर उन्हें ट्रांसफर कराने की धमकी तक दी। उन्होंने अनुशासनहीनता, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की। उनका सवाल है कि अगर शिकायत करने के बाद कार्रवाई शिकायतकर्ताओं पर होने के बजाय अधिकारी का ही तबादला कर दिया जाए तो इससे प्रशासनिक अधिकारियों में क्या संदेश जाएगा?
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फूल सिंह बरैया ने मुख्यमंत्री से कहा है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को संरक्षण और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी अधिकारी को लगातार छोटी अवधि में हटाया जाता रहेगा तो वह अपने कार्यक्षेत्र में सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कैसे कर पाएगा? बरैया ने यह भी कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा के कई विधायक भी समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि नेहा मारव्या के खिलाफ लगातार बन रहे माहौल और उनके तबादलों के पीछे कौन लोग हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि नेहा मारव्या के पिछले एक साल के सभी तबादलों की परिस्थितियों की जांच कराई जाए और यह भी देखा जाए कि प्रत्येक तबादले के पीछे प्रशासनिक कारण क्या थे।