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मध्यप्रदेश विधानसभा होगी पेपरलेस! 28 अक्टूबर से विधायकों की डिजिटल क्लास, जानें क्या-क्या बदलेगा

Sat, 24 Oct 2026 06:43 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश विधानसभा में अब प्रश्न लगाने से लेकर ध्यानाकर्षण और याचिकाएं प्रस्तुत करने तक की प्रक्रिया डिजिटल बनाने की तैयारी है। 28 से 30 अक्टूबर तक विधायक नेवा (NeVA) का प्रशिक्षण लेंगे, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर करेंगे उद्घाटन।
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मध्यप्रदेश विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश विधानसभा में अब विधायी कामकाज को डिजिटल बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए विधायकों को नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 28 से 30 अक्टूबर तक चलेगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे विधानसभा परिसर में इसकी शुरुआत करेंगे। ई-विधान व्यवस्था लागू होने के बाद विधायकों को सदन में प्रश्न लगाने, ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्ताव की सूचनाएं देने, संकल्प प्रस्तुत करने और याचिकाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करना होगा। इससे विधायी कामकाज में कागजों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जाएगी।
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पांच बैच में होगा प्रशिक्षण
सभी विधायकों को नेवा एप्लीकेशन के इस्तेमाल और सदन की डिजिटल कार्यप्रणाली की जानकारी देने के लिए पांच बैच बनाए गए हैं। प्रत्येक बैच में 50 विधायकों को शामिल करने की रूपरेखा है। प्रशिक्षण के दौरान ऑनलाइन प्रश्न-उत्तर, डिजिटल विधायी दस्तावेजों और सदन से संबंधित अन्य प्रक्रियाओं के इस्तेमाल का अभ्यास कराया जाएगा। विधायकों के साथ काम करने वाले ओएसडी और निजी सहायकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
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सदन की कार्यसूची से विधेयकों तक मिलेगी डिजिटल जानकारी
ई-विधान व्यवस्था के तहत सदन की कार्यसूची, प्रश्नों के उत्तर, विधेयकों और अन्य विधायी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की योजना है। पुराने प्रश्नों और सदन की कार्यवाही को भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा। इससे विधायकों को जरूरी जानकारी हासिल करने और सदन से संबंधित कामकाज पूरा करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। 

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कागजी प्रक्रिया घटाने पर जोर
नेवा के जरिए विधानसभा के कामकाज को एक डिजिटल मंच पर लाने की पहल की जा रही है। इससे दस्तावेजों के प्रबंधन में लगने वाला समय कम करने और विधायी सूचनाओं तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए विधायकों और उनके सहयोगी कर्मचारियों का तकनीकी प्रशिक्षण अहम होगा।
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