फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhopal News: एक सरकारी संस्था, जिसे नहीं पता उनके मंत्री का विभाग, विधायक को कहते हैं सांसद!

Fri, 03 May 2024 02:47 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

शासकीय अनुदान पर संचालित मसाजिद कमेटी ने अपनी संस्थागत वेबसाइट पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर को जगह दी गई है। लेकिन, उनके परिचय में मंत्री का विभाग ही गलत लिख दिया गया है।  
विज्ञापन
विधायक कृष्णा गौर को बातया सांसद। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश की मुस्लिम संस्थाओं की अलाली, बेफिक्री, लापरवाही वल्लाह...! आपस में सियासत की पराकाष्ठा तक पहुंच जाने वाली इन संस्थाओं को अपने विभागीय मंत्री के बारे में भी जानकारी नहीं है। प्रदेश की मंत्री को वे अपनी संस्थागत वेबसाइट पर सांसद कहकर संबोधित करते हैं। इंतेहा यह भी है इन्हें मंत्री के विभाग की भी समुचित जानकारी नहीं है।

विज्ञापन


बात प्रदेश के तीन जिलों भोपाल, रायसेन और सीहोर में शासकीय अनुदान पर संचालित मसाजिद कमेटी की है। विभाग ने अपनी संस्थागत वेबसाइट पर प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव को जगह दी है। इसके अगले पेज पर काजी ए शहर का पैगाम चस्पा किया गया है। वेबसाइट पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर को भी जगह दी गई है। लेकिन, उनके परिचय में मंत्री का विभाग ही गलत लिख दिया गया है। गलतियों का यह दौर वेबसाइट के अगले दौर तक जारी रहा है। जिसमें विभागीय मंत्री कृष्णा गौर को पुष्प गुच्छ से सम्मानित करते हुए एक तस्वीर मौजूद है। इसमें मंत्री कृष्णा गौर को सांसद कहकर संबोधित किया गया है। जबकि कृष्णा गौर भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री की हैसियत से मौजूद हैं। 

जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप, वह वेबसाइट पर मौजूद
मसाजिद कमेटी में प्रभारी सचिव रहे यासिर अराफात अब भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हुए हैं। विभागीय जांच में दोषी करार दिए जाने के बाद उनके खिलाफ थाना शाहजहानाबाद में एफआईआर भी की गई है। इन्हीं सब मामलों के चलते निलंबित किए जा चुके यासिर अराफात की तस्वीर अब भी संस्था की वेबसाइट पर मौजूद हैं। यहां मंत्री कृष्णा गौर का स्वागत करते हुए यासिर अराफात दिखाई दे रहे हैं। हालांकि कमेटी ओहदेदार इसको पुरानी तस्वीर बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन सवाल उठाए जा रहे हैं कि वेबसाइट संस्था की है, इसको अपडेट करना भी इसके कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। विभागीय घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोपी की तस्वीर वेबसाइट पर मौजूद रहना मसाजिद कमेटी के कर्मचारियों की लापरवाही मानी जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें