देवास की माता टेकरी पर नवरात्रि में 38 लाख रुपए का चढ़ावा
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मध्यप्रदेश के देवास में स्थित माता टेकरी पर नवरात्रि में भक्तों ने करीब 38 लाख रुपए का दान दिया। इसके अलावा दो अलग जगहों से नकद राशि दी गई है, जिस हिसाब से करीब 41 लाख रुपए की गणना हुई है। चढ़ावे में सोने-चांदी के जेवरात भी हैं। रोचक बात तो यह है कि दान पेटी से चिट्ठियां भी निकलीं हैं जिनमें भक्तों ने मां से अर्जी लगाई है तो कुछ ने मनोकामना पूरी होने पर धन्यवाद दिया है।
नवरात्रि के बाद सोमवार को माता टेकरी की दान पेटियां खुलीं थीं। राजस्व अमले की टीम इस काम में जुटी थी। मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता के दरबार की दान पेटियां खोली गईं । 80 से ज्यादा पटवारियों की टीम गणना में जुटी थी। सोमवार को जहां चामुंडा माता मंदिर की सात पेटियां खुली थीं तो मंगलवार को तुलजा भवानी माता मंदिर की मुख्य दानपेटी सहित पांच अन्य दानपेटी खोली गई।
नौ दिन में लगभग 38 लाख का चढ़ावा
मंगलवार को गणना का काम पूरा हुआ। नौ दिनों में लगभग 38 लाख रुपए का चढ़ावा आया। सोने और चांदी के आभूषण भी मिले हैं। विदेशी मुद्राएं भी दान पेटी से निकली हैं। डिजिटल पेमेंट के माध्यम से भी माता टेकरी पर चढ़ावा आया है। नवरात्रि के पहले दानपेटियां खोली गई थीं। एक अस्पताल संचालक ने एक लाख और एक-दो अन्य लोगों ने भी करीब दो लाख रुपए नकद दान दिया। इस हिसाब से 41 लाख रुपए के लगभग चढ़ावा मिला है।
चिट्ठियों में लिखी मन की बात
माता से मन्नत मांगने यूं तो हर साल भक्त माता टेकरी पहुंचते हैं लेकिन इस बार भक्तों ने मन की कामना को चिट्ठी में लिखकर माता के सम्मुख रखा। दान पेटी से ऐसी चिट्ठियां निकलीं हैं जिनमें भक्तों ने अपनी मनोकामना लिखी है। सोमवार को एक चिट्ठी में यह लिखा था कि उससे मिलाने के लिए थैंक्यू मां तो एक महिला ने मां से अर्जी लगाई थी कि मां, पति की नौकरी नोट प्रेस में लगवा देना। इसी तरह अन्य चिट्ठियां भी निकली हैं जिनमें अलग अलग बातें लिखी हैं। माताजी मेरी मां को ठीक कर दो। माताजी मेरी किसी भी विभाग में सरकारी नौकरी लग जाए। माताजी मेरा मकान बन जाए। माताजी मेरी प्रेमिका से प्रेम विवाह हो जाए।
लाखों भक्तों ने किए दर्शन
माता टेकरी पर तुलजा भवानी और चामुंडा माता विराजमान है। हजारों साल पुराना मंदिर है। मां काली, हनुमान और भैरव भी यहां माता के साथ विराजित है। तुलजा भवानी बड़ी माता और चामुंडा माता छोटी माता के नाम से जानी जाती है। दोनों को बहनें कहा जाता है। वर्ष की दोनों नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शारदीय नवरात्र में भीड़ अधिक रहती है। इस साल भी नवरात्रि के नौ दिनों में करीब दस लाख से अधिक दर्शनार्थी माता के दर्शन के लिए आए थे।