विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशजी ने बुधवार को चेतावनी दी कि हमें अयोध्या की 42 कोस की सांस्कृतिक सीमा में मस्जिद का निर्माण मंजूर नहीं है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस सीमा के बाहर मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन दे सकती है।
बाबर के नाम से मस्जिद पूरे देश में कहीं स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण करना है। विहिप को ट्रस्ट में शामिल करेंगे या नहीं, यह उनका विषय है।
विहिप की मंशा है कि किसी भी कीमत पर सरकार मंदिर का हमारा मॉडल, शिलाखंड और पूजित शिलाएं स्वीकार करे। इससे कोई समझौता नहीं होगा। इसके लिए हम हर हद तक जाने को तैयार हैं।
दिनेशजी बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं ने सैकड़ों साल से शहादत दी। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने सर्वसम्मति से रामलला जन्मस्थान के पक्ष में फैसला दिया।
अब सृजन और रचनात्मक कार्यों की भूमिका शुरू हो रही है। राम मंदिर निर्माण को लेकर विहिप का मॉडल बीसों साल से देश-विदेश में पहुंच गया है। अब कोई कह रहा है कि अंकोरवाट के मॉडल से मंदिर बने तो कोई और मॉडल गिना रहा है, लेकिन हमारा स्पष्ट आग्रह है कि विहिप के मॉडल पर ही राम मंदिर बने।
हमारी साठ प्रतिशत शिलाएं तैयार हैं, जिससे प्रथम तल तैयार हो जाएगा। तीन लाख गांवों से आई पूजित शिलाएं भी मौजूद हैं। न्यास के पास एक-एक पैसे का हिसाब है। पूजित शिलाओं से आठ करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे जबकि शिलाएं तैयार करने में अब तक 50 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं। समूचे 67 एकड़ के लिए हमारा मास्टर प्लान तैयार है।
केंद्र सरकार चाहे तो हमसे मास्टर प्लान लेकर योजनाएं बना सकती है। केंद्र सरकार नया ट्रस्ट बनाए। उसमें जिसे चाहे शामिल करे, विहिप को कोई आपत्ति नहीं है।
सरकार हमें ट्रस्ट में शामिल करेगी तो हम अंदर से, वरना बाहर से भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विहिप के कुछ नेताओं द्वारा दूसरे अभियान पर लगने के बयान पर कहा कि आधी छोड़ पूरी को धावै, आधी मिली न पूरी पावै...की कहावत नहीं दोहरानी है।
दिनेशजी ने कहा कि रामलला सखा के रूप में पहले देवकीनंदन पक्षकार थे। उनके निधन के बाद विहिप के त्रिलोकीनाथ पांडेय पक्षकार बने। उनकी भूमिका भी नौ नवंबर को अंतिम फैसला आने के बाद पूरी तरह समाप्त हो गई है।
कोई कह रहा है कि त्रिलोकीनाथ पांडेय अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि के मालिक हो रहे हैं, यह सब अफवाह है। 1993 में केंद्र सरकार के अधिग्रहण कानून के बाद न्यास के पक्ष में आवंटित की गई जमीन का भी अस्तित्व समाप्त हो गया था।
सब केंद्र के हवाले हो गया था। त्रिलोकीनाथ पांडेय कहीं मालिक नहीं होने जा रहे हैं। पत्रकार वार्ता में रामलला सखा त्रिलोकीनाथ पांडेय, महंत सियाकिशोरी शरण, महंत अवधेश दास, महंत पवन दास, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास मौजूद रहे।