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विहिप की चेतावनी, अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में मस्जिद मंजूर नहीं

Thu, 14 Nov 2019 03:36 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो अयोध्या
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विश्व हिंदू परिषद संरक्षक दिनेश जी - फोटो : amar ujala
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विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेशजी ने बुधवार को चेतावनी दी कि हमें अयोध्या की 42 कोस की सांस्कृतिक सीमा में मस्जिद का निर्माण मंजूर नहीं है। सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस सीमा के बाहर  मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन दे सकती है।

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बाबर के नाम से मस्जिद पूरे देश में कहीं स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को ट्रस्ट बनाकर भव्य राम मंदिर का निर्माण करना है। विहिप को ट्रस्ट में शामिल करेंगे या नहीं, यह उनका विषय है।

विहिप की मंशा है कि किसी भी कीमत पर सरकार मंदिर का हमारा मॉडल, शिलाखंड और पूजित शिलाएं स्वीकार करे। इससे कोई समझौता नहीं होगा। इसके लिए हम हर हद तक जाने को तैयार हैं।
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दिनेशजी बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए हिंदुओं ने सैकड़ों साल से शहादत दी। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने सर्वसम्मति से रामलला जन्मस्थान के पक्ष में फैसला दिया।

अब सृजन और रचनात्मक कार्यों की भूमिका शुरू हो रही है। राम मंदिर निर्माण को लेकर विहिप का मॉडल बीसों साल से देश-विदेश में पहुंच गया है। अब कोई कह रहा है कि अंकोरवाट के मॉडल से मंदिर बने तो कोई और मॉडल गिना रहा है, लेकिन हमारा स्पष्ट आग्रह है कि विहिप के मॉडल पर ही राम मंदिर बने।

हमारी साठ प्रतिशत शिलाएं तैयार हैं, जिससे प्रथम तल तैयार हो जाएगा। तीन लाख गांवों से आई पूजित शिलाएं भी मौजूद हैं। न्यास के पास एक-एक पैसे का हिसाब है। पूजित शिलाओं से आठ करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे जबकि शिलाएं तैयार करने में अब तक 50 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं। समूचे 67 एकड़ के लिए हमारा मास्टर प्लान तैयार है।

केंद्र सरकार चाहे तो हमसे मास्टर प्लान लेकर योजनाएं बना सकती है। केंद्र सरकार नया ट्रस्ट बनाए। उसमें जिसे चाहे शामिल करे, विहिप को कोई आपत्ति नहीं है।

सरकार हमें ट्रस्ट में शामिल करेगी तो हम अंदर से, वरना बाहर से भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विहिप के कुछ नेताओं द्वारा दूसरे अभियान पर लगने के बयान पर कहा कि आधी छोड़ पूरी को धावै, आधी मिली न पूरी पावै...की कहावत नहीं दोहरानी है।

दिनेशजी ने कहा कि रामलला सखा के रूप में पहले देवकीनंदन पक्षकार थे। उनके निधन के बाद विहिप के त्रिलोकीनाथ पांडेय पक्षकार बने। उनकी भूमिका भी नौ नवंबर को अंतिम फैसला आने के बाद पूरी तरह समाप्त हो गई है।

कोई कह रहा है कि त्रिलोकीनाथ पांडेय अधिगृहीत 67 एकड़ भूमि के मालिक हो रहे हैं, यह सब अफवाह है। 1993 में केंद्र सरकार के अधिग्रहण कानून के बाद न्यास के पक्ष में आवंटित की गई जमीन का भी अस्तित्व समाप्त हो गया था।

सब केंद्र के हवाले हो गया था। त्रिलोकीनाथ पांडेय कहीं मालिक नहीं होने जा रहे हैं। पत्रकार वार्ता में रामलला सखा त्रिलोकीनाथ पांडेय, महंत सियाकिशोरी शरण, महंत अवधेश दास, महंत पवन दास, कारसेवकपुरम प्रभारी शिवदास मौजूद रहे।
 

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निर्मोही अखाड़ा को ट्रस्ट में शामिल करे सरकार, उनकी पूजा-पद्धति विहिप को मंजूर
दिनेशजी ने कहा कि सरकार के ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को शामिल करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है। हम इसका स्वागत करते हैं। रामलला की पूजा-अर्चना निर्मोही अखाड़़े की परंपरा से होती रही है। उसी तरह से आगे भी होती रहनी चाहिए। 

रामलला का होता रहे निर्बाध दर्शन-पूजन
विहिप का कहना है कि मंदिर निर्माण में तीन से साढ़े तीन साल लग सकते हैं। ऐसे में मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले सरकार संतों, वास्तुकार और जानकारों के साथ विचार-विमर्श करके टेंट में विराजमान रामलला को कहीं व्यवस्थित रूप से रखकर नित्य पूजन-अर्चन के साथ श्रद्धालुओं के निर्बाध दर्शन की व्यवस्था करे। विग्रह परिसर में ही रहेगा। उसकी उचित व्यवस्था होनी चाहिए, इसका पूजन-अर्चन भी निर्मोही अखाड़ा देखे।

सरकार हैंडओवर कर ले न्यास, कोई आपत्ति नहीं
विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद न्यास की भूमिका अब नहीं रही। इसकी हर एक संपत्ति पर सरकार का अधिकार है। वह इसे हैंडओवर कर सकती है। न्यास के पास 40 करोड़ की जमीन है, एक भी जमीन गैर हिंदू की नहीं है।  


मंदिर के लिए गिनाए तरह-तरह के संकल्प
दिनेशजी ने कहा कि 1990 से लेकर 1992 तक के आंदोलनों में तमाम लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए तरह-तरह के संकल्पों के साथ जीवन गुजारा है। उन्होंने उड़ीसा के एक मंत्री से लेकर दिल्ली के आईपीएस अफसर के नाम गिनाते हुए कहा कि किसी ने राम मंदिर बनने के बाद ही शादी का संकल्प लिया था तो किसी ने चप्पल-जूता न पहनने और अन्न न ग्रहण करने का संकल्प लिया था। अब इन सभी से सामान्य जीवन और दिनचर्या में आने का निवेदन है।

अयोध्या में बने स्मारक और शोध केंद्र
दिनेशजी ने कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हमारा निवेदन है कि राम मंदिर आंदोलन में गोरखपुर पीठ की खप गई तीन-तीन पीढ़ियों समेत अशोक सिंहल आदि शीर्ष नेताओं के साथ भक्तों ने मंदिर के लिए शहादत दी है, इनकी स्मृति में सरकार अयोध्या में स्मारक बनाने पर विचार करे। अयोध्या को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। देश-दुनिया से आने वाले लोगों के लिए शोध केंद्र स्थापित हो, जहां लोग अयोध्या की पुरातन स्मृतियों से साक्षात्कार कर सकें। 

राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा हो आजानुबाहु  
दिनेशजी ने कहा, हमने मुख्यमंत्री योगी से मिलकर आग्रह किया है कि अयोध्या में भगवान राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा आजानुबाहु की होनी चाहिए। यानी उनका हाथ घुटने के नीचे तक जाता हो। साथ ही प्रतिमा का मुख अयोध्या की तरफ आशीर्वाद देने की मुद्रा में हो।
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