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बाहरी न अड़ाएं टांग, बनाई जाए मस्जिद इत्तेहाद, ओवैसी क्या जाने उत्तर प्रदेश का हाल: रिजवी

Wed, 13 Nov 2019 11:04 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डॉ अम्मार रिजवी - फोटो : amar ujala
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‘ऑल इंडिया माइनारिटीज फोरम फॉर डेमोक्रसी’ के अध्यक्ष पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने अयोध्या मामले में बाहरी लोगों से टांग अड़ाने की प्रवृत्ति से बाज आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ओवैसी जैसे लोगों को इस मामले में बोलने का कोई हक नहीं है। 
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जब मूल मुद्दई सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मानने की बात कह चुके हैं तो वह इस मामले में बोलने वाले कौन होते हैं? उन्होंने मांग की कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार अयोध्या में बनाई जाने वाली मस्जिद का नाम ‘यूनिटी आफ मॉस्क’ (मस्जिद इत्तेहाद) रखा जाना चाहिए। जिससे लोगों को दुकानदारी करने का मौका न मिले।

डॉ. रिजवी ने बुधवार को यहां कहा कि बाबरी मस्जिद के मूल मुद्दई इकबाल अंसारी ने जिस तरह खुले दिल से फैसला मानने की बात कही है उसने समाज को सकारात्मक संदेश दिया है। इसके लिए वह  अपने संगठन की तरफ से इकबाल को सम्मानित करेंगे। 
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कहा कि जिस तरह सभी पक्षों ने अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वीकार किया है, उससे ओवैसी जैसे लोगों में छटपटाहट स्वाभाविक है। वह लोगों को भड़काकर समाज में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बड़ी कृपा होगी कि ओवैसी जैसे लोग इस मसले को उत्तर प्रदेश वालों के जिम्मे ही रहने दें।
 

मतभेदों की दीवार गिरी रहने दें

डॉ. रिजवी ने कहा कि लोगों को संयोगों को समझना चाहिए। हिंदू-मुसलमानों के बीच परस्पर सौहार्द्र और प्रेम की बुनियाद मजबूत करने वाला यह फैसला उस दिन आया जिस दिन 1989 में जर्मनी के लोगों ने बर्लिन की दीवार तोड़कर दोनों जर्मनी का एकीकरण हुआ था। 

संयोग से फैसला उसी समय सुनाना शुरू हुआ जिस समय जर्मनी के समयानुसार दीवार गिराना शुरू हुआ था। इसलिए लोगों को देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच मतभेदों की दीवार गिराने वाले इस फैसले को खुले दिल व दिमाग से स्वीकार करना चाहिए।

पुलिस व आर्मी नहीं करती अल्पसंख्यकों की सुरक्षा
उन्होंने कहा कि लोगों को मुस्लिमों के मुद्दे पर राजनीति करने के और अवसर मिलेंगे। कम से कम अब इस मामले में शांति रहने दें। पहले ही इस विवाद के चलते मुल्क और समाज का बड़ा नुकसान हो चुका है। 

कहा कि इस मामले में अब अकारण विवाद खड़ा करने वाले इस तथ्य को न भूले कि देश और प्रदेश में अल्पसंख्यक समाज की सुरक्षा पुलिस या आर्मी की बदौलत नहीं बल्कि हिंदुओं की उदारता के कारण है। जो लोग इस मुद्दे पर अब आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं वे अल्पसंख्यक समाज के हितैषी नहीं है।
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ट्रस्टों में हों दोनों पक्षों के लोग

मंदिर की तरह मस्जिद के लिए भी ट्रस्ट की मांग कर चुके डॉ. रिजवी ने कहा कि अच्छा होगा यदि मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट में बाबरी मस्जिद की पैरोकारी करने वाले इकबाल जैसे मूल पक्षकारों को भी रखा जाए और मस्जिद के लिए जो ट्रस्ट बने उसमें रामलला के मंदिर के लिए पैरवी करने वाले मूल वादियों को भी रखा जाए। इससे भावी पीढ़ियों को अच्छा संदेश जाएगा।
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