18 अक्तूबर को होने जा रहे विधानसभा के एक दिवसीय सत्र में उत्तर प्रदेश औद्योगिक शांति (मजदूरी का यथासंभव संदाय संशोधन) अध्यादेश 2021 पारित करने की तैयारी है। इस अध्यादेश के मुताबिक मजदूरी न देने पर नियोक्ता को जेल की सजा नहीं होगी। इस एजेंडे को कार्यसूची में कार्यसूची में शामिल कर लिया गया है।
अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन सुरेश चंद्रा के मुताबिक इस अधिनियम में संशोधन की मंजूरी को कैबिनेट अनुमोदित कर चुकी है। इसमें पहले प्रावधान यह था कि यदि किसी नियोक्ता पर किसी श्रमिक की एक लाख रुपये या इससे ज्यादा मजदूरी बकाया है और नियोक्ता उसका भुगतान नहीं कर रहा है तो नियोक्ता को सजा हो सकती है।इसके तहत नियोक्ता को तीन माह से तीन वर्ष तक की सजा एवं पचास हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान था।
संशोधन में नियोक्ता को जेल नहीं होगी। जेल का प्रावधान खत्म कर केवल जुर्माना ही लगाया जाएगा। जुर्माना पचास हजार से एक लाख रुपये तक लगाया जा सकेगा। इस अध्यादेश को अब विधानसभा सत्र में पेश कर पारित करने कराने की पूरी तैयारी है।