उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि दाल के दाम कहीं भी 100 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कहीं नहीं है। वो लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। प्रेस वार्ता के दौरान कृषि मंत्री से पूछा गया कि दलहन उत्पादन बढ़ रहा है तो बाजार में दाल का भाव क्या है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि दाल 100 रुपये किलो से ज्यादा कहीं नहीं है। दाल 100 रुपये किलो मिल रही है। इस पर पत्रकारों ने उनसे पूछा कि 100 रुपये किलो दाल कहां मिल रही है, तो मंत्री सूर्य प्रताप शाही हंसने लगे।
उन्होंने कहा कि दाल के दाम को नियंत्रित करने के लिए ही तो उत्पादन बढ़ाया जा रहा है। कृषि मंत्री ने बताया कि दलहन व तिलहन की खेती पर सरकार का जोर है। अब दलहन का उत्पादन 23.94 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 32.53 मीट्रिक टन हो गया है। यूपी को दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास है। कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ में 34.75 लाख हेक्टेयर में फसलें लगाई गई हैं।
प्राकृतिक खेती पर चर्चा के लिए जुटेंगे 12 राज्यों के 500 प्रतिनिधि
उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए 19 जून को लखनऊ स्थित होटल में क्षेत्रीय परामर्श कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें 12 राज्यों के 500 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत मौजूद रहेंगे। यह जानकारी कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दी। वे मंगलवार को
कृषि मंत्री ने बताया कि परामर्श कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, बिहार, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख व चंडीगढ़ के किसान प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। केंद्र, राज्य सरकारों व केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारी, 15 कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति व डीन, 180 कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक भी मौजूद रहेंगे।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य स्तरीय प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन 20 जुलाई को अयोध्या के कुमारगंज स्थित आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में होगा। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के 25 कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, प्राकृतिक खेती के नोडल अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, डीन और लगभग 250 किसान रहेंगे। इसी के तहत श्रीअन्न को लेकर 26 जुलाई को बांदा कृषि विश्वविद्यालय में भी कार्यशाला होगी।कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्रीय कृषि विवि झांसी और बांदा कृषि विवि में लैब बनाई जाएगी। यह लैब प्राकृतिक खेती की जांच करेगी। एक से डेढ़ वर्ष के भीतर यहां टेस्टिंग शुरू हो जाएगी।