मुख्यमंत्री योगी ने शीतलहरी के दौरान निराश्रित, असहाय और कमजोर वर्ग के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थल पर अलाव जलवाने और जरूरतमंदों को कंबल बांटने के लिए व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक तहसील को कंबल खरीदने के लिए 5 लाख रुपये व अलाव जलवाने के लिए पांच लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार शीतलहरी के दौरान समस्याओं से घिरे निराश्रित, असहाय और कमजोर वर्ग के लोगों की मदद के लिए आगे आई है। अपर मुख्य सचिव राजस्व मनोज कुमार सिंह ने इसके लिए प्रदेश की 350 तहसीलों के लिए 19.25 करोड़ जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतलहरी के दौरान निराश्रित, असहाय और कमजोर वर्ग के लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सार्वजनिक स्थल पर अलाव जलवाने और जरूरतमंदों को कंबल बांटने के लिए व्यवस्था के निर्देश दिए हैं।
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राजस्व विभाग ने इस पर अमल करते हुए प्रत्येक तहसील को कंबल खरीदने के लिए 5 लाख रुपये व अलाव जलवाने के लिए पांच लाख रुपये जारी कर दिए हैं। इस तरह 17.50 करोड़ रुपये कंबल खरीदने व 1.75 करोड़ रुपये अलाव जलाने के लिए दिए गए हैं। जिलाधिकारियों को निराश्रित, असहाय व कमजोर वर्ग के लोगों को ठंडक से बचाने के लिए कंबल बांटने, अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था करने, भोजन उपलब्ध कराने, रैन बसेरे, वस्त्र और चिकित्सा की व्यवस्था की कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में तत्काल रैनबसेरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि प्रदेश के हर जिले में तत्काल रैन बसेरा का इंतजाम किया जाए। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाए कि वहां कोविड प्रोटोकॉल का पालन हो। वह शनिवार को अपने सरकारी आवास पर उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम बदलने के बाद सर्दी का असर तेज हो गया है। ऐसे में रैन बसेरे का पुख्ता इंतजाम किया जाए। यहां सभी तरह की व्यवस्थाएं की जाएं। रैनबसेरों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। जीका वायरस की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जीका वायरस की पॉजिटिविटी दर में निरंतर कमी आ रही है। मुख्यमंत्री ने हर संक्त्रस्मित के स्वास्थ्य की निगरानी करने के निर्देश दिए।
यह भी बताय गया कि अब तक प्रदेश में 518 आक्सीजन प्लांट क्त्रिस्याशील किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी क्रय केन्द्रों पर पूरी पारदर्शिता के साथ धान खरीद की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसान को अपनी उपज बेचने में कोई असुविधा न हो। अधिकारियों द्वारा धान खरीद प्रक्त्रिस्या की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। जिलाधिकारी धान क्त्रस्य केन्द्रों का नियमित तौर पर निरीक्षण करें। किसानों को उनकी उपज का समय से भुगतान सुनिश्चित किया जाए।