दरिया के तलातुम से तो बच सकती है कश्ती।
कश्ती में तलातुम हो तो साहिल न मिलेगा। -मलिकजादा मंजूर अहमद
तलातुम यानी तूफान जोरों पर है। तूफान में ही कश्ती है। मौजें भी बेताब हैं, नाविक की कुशलता का इम्तिहान लेने को। पर, खतरा सिर्फ लहरों से ही नहीं। खतरा सिर्फ उठते तूफान से ही नहीं। उससे तो लड़ ही लेंगे। लड़ भी रहे हैं। पर, जो बवंडर कश्ती के अंदर है, उसका क्या? वो बवंडर जो तूफान से भी ज्यादा बेताब है कश्ती को डुबोने को...। यूपी में चुनावी रणभूमि का कुछ ऐसा ही हाल है। यहां पग-पग पर खतरे हैं। बाहर भी, घर के भीतर भी...। कुल मिलाकर कहें तो इम्तिहान कठिन है...। भितरघातियों से पार पाने की हर दल के सामने चुनौती है। बहरहाल, आज पढ़ें थानाभवन, बाह और मीरापुर विधानसभा क्षेत्रों में कैसे समीकरण बन रहे हैं...
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और हरियाणा की सीमाओं से जुड़ी शामली जिले की थानाभवन सीट चीनी का कटोरा कहे जाने वाले क्षेत्र का हिस्सा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में गन्ना और गन्ना किसान हमेशा से बड़ा मुद्दा रहे हैं। विपक्ष और किसान संगठन गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ना मूल्य वृद्धि के मुद्दे पर सरकार को घेरते रहे हैं, तो भाजपा सरकार पूर्व सरकारों से बेहतर भुगतान दर होने का दावा करती रही है।
भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच हो रही गन्ना किसानों को लुभाने की कोशिशों के बीच यह चुनाव गन्ना मंत्री सुरेश राणा के लिए एक इम्तिहान है। रालोद-सपा गठबंधन ने अशरफ अली खान, बसपा ने जहीर मलिक, कांग्रेस ने सत्यम सैनी और आम आदमी पार्टी ने अरविंद देशवाल को मैदान में उतारा है।
सुरेश राणा और अशरफ अली खान इससे पहले 2012 के चुनाव में भी आमने-सामने थे। तब दोनों के बीच कांटे मुकाबला हुआ था और महज 265 वोटों के अंतर से सुरेश राणा ने जीत दर्ज की थी। सुरेश राणा को 53,719 वोट मिले थे। उस समय दो मुस्लिम प्रत्याशियों में रालोद के अशरफ अली को 53,454 और बसपा के अब्दुल वारिस को 50 हजार वोट मिले थी। 2017 में सुरेश राणा ने फिर जीत दर्ज की। क्षेत्र के मौजूदा सियासी मिजाज की बात करें, तो गन्ना मूल्य भुगतान सहित किसानों के अन्य मुद्दे, कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
थानाभवन निवासी अरविंद बताते हैं, इस बार यहां चुनाव में कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं। वह कहते हैं, कृषि कानूनों को लेकर हुए आंदोलन का असर अब भी बरकरार है। हिरनवाड़ा निवासी बिजेंद्र सिंह कहते हैं, केंद्र सरकार ने कानूनों को वापस ले लिया, इससे भाजपा को बड़ा नुकसान होने से बच गया है। कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे का फायदा उसे मिल रहा है।
कस्बा जलालाबाद निवासी अकरम का कहना है, भाजपा बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर विफल साबित हुई है। पर, चुनाव में अंतिम समय में माहौल बदल जाते हैं। क्योंकि, धर्म और जाति के आधार पर ही ज्यादातर लोग वोट करते हैं। बुंटा निवासी साजिद का कहना है, सरकारी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों को मिला है। यह सही है। लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि महंगाई बेतहाशा बढ़ी है और कोरोना महामारी के चलते आमदनी घट गई है।