मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने मंत्रियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब विभागीय मंत्री पहले से दोगुनी लागत की वित्तीय स्वीकृतियां अपने स्तर से ही जारी करने की अनुमति दे सकेंगे।
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प्रदेश कैबिनेट ने मंत्रियों के वित्तीय अधिकार बढ़ाने के लिए बजट मैनुअल की धारा-94 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
बजट मैनुअल की इस धारा में एकमुश्त प्रावधान वाली परियोजनाओं में विभागीय मंत्री को वर्तमान में पांच करोड़ रुपये तक की वित्तीय स्वीकृतियां की मंजूरी देने का अधिकार है। पांच करोड़ से अधिक और 15 करोड़ की सीमा की स्वीकृतियां वित्त मंत्री की सहमति लेकर जारी की जा सकती है। 15 करोड़ से ऊपर के सभी प्रस्ताव मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद जारी होते हैं।
बजट मैनुअल में संशोधन कर विभागीय मंत्री को वित्तीय स्वीकृतियों का अनुमोदन देने की वित्तीय सीमा पांच करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दी गई है। इसके अलावा विभागीय मंत्री के माध्यम से वित्त मंत्री की सहमति से लेकर 10 करोड़ से अधिक और 25 करोड़ तक की एकमुश्त प्रावधान वाली परियोजनाओं से जुड़ी वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा सकेंगी। 25 करोड़ से ऊपर वाले वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े प्रस्ताव ही अब मुख्यमंत्री की सहमति के लिए भेजे जाएंगे।
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इसलिए बढ़ाए अधिकार
अधिकारी बताते हैं कि हाल के वर्षों में परियोजनाओं की सामग्री की लागत बढ़ी है। इससे परियोजनाओं की लागत भी बढ़ी है। इसके अलावा 15 करोड़ से अधिक लागत की सभी स्वीकृतियों की फाइल मुख्यमंत्री की सहमति के लिए जाने की वजह से मुख्यमंत्री के स्तर पर काम का दबाव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए मंत्रियों को एकमुश्त वित्तीय स्वीकृतियाें से जुड़े अनुमोदन देने की वित्तीय सीमा बढ़ाई गई है।
इस तरह बढ़े अधिकार
स्तर--पहले--अब
विभागीय मंत्री--5 करोड़ तक--10 करोड़ तक
वित्त मंत्री की सहमति से--15 करोड़ तक--25 करोड़ तक
मुख्यमंत्री--15 करोड़ से ऊपर--25 करोड़ से ऊपर
कुंभ की तैयारियों को लेकर किया फैसला
दूसरा फैसला- इलाहाबाद में रेलवे के तीन अंडरपास होंगे चौड़े
अर्धकुंभ में आने वाले तीर्थयात्रियों की भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए सरकार ने इलाहाबाद शहर में अर्धकुंभ मेला क्षेत्र में पड़ने वाले रेलवे के तीन अंडरपास को चौड़ा करने का फैसला किया है। इस बारे में नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। तीनों अंडरपास को चौड़ा करने पर प्रदेश सरकार का करीब 20 करोड़ खर्च होगा। हालांकि इसका काम रेलवे को सौंपने का फैसला किया गया है।
तीसरा फैसला- गन्ना मूल्य वृद्धि पर कैबिनेट की मुहर
पेराई सत्र 2017-18 के लिए गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) में 10 रुपये की वृद्धि पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बीते 26 अक्तूबर को घोषित गन्ना मूल्य का अनुमोदन कर दिया गया। राज्य सरकार ने सामान्य और अगेती प्रजाति का गन्ना मूल्य क्रमश: 315 व 325 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। अनुपयुक्त प्रजाति का मूल्य 310 रुपये क्विंटल होगा।
गौरतलब है कि 27 अक्तूबर को निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 26 अक्तूबर को राज्य सरकार ने आनन-फानन में गन्ना मूल्य घोषित कर दिया था। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट से मंजूरी की प्रत्याशा में गन्ना मूल्य घोषित किया था। मंगलवार को गन्ना मूल्य में वृद्धि का प्रस्ताव कैबिनेट केसमक्ष रखा गया जिसे मंजूरी दे दी गई। हालांकि निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने की वजह से कैबिनेट के इस फैसले की औपचारिक रूप से जानकारी नहीं दी गई।
चौथा फैसला- एनएच बनेगा दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री मार्ग
दिल्ली से सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड के युमनोत्री तक जाने वाले मार्ग राष्ट्रीय राज मार्ग बनाने केलिए प्रदेश सरकार ने अनापत्ति (एनओसी) दे दिया है। उप्र राज्य राजमार्ग प्रधिकरण (उपसा) द्वारा रखे गए अपनापत्ति देने से संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार की ओर से एनओसी दिए जाने केबाद केन्द्र सरकार जल्द ही इस मार्ग को राष्ट्रीय राज मार्ग घोषित कर देगा।
दरअसल अब तक इस मार्ग का रखरखाव चौड़ीकरण का काम उपसा द्वारा कराया जा रहा था। लेकिन कार्यदायी संस्था ने बीच में काम छोड़ दिया है। तब से सड़क के चौड़ीकरण का काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में केन्द्र सरकार ने इस सड़क को राष्ट्रीय राज मार्ग घोषित करने का फैसला किया है। चूंकि इस मार्ग का सबसे बड़ा हिस्सा यूपी में गाजियाबाद केलोनी से शुरू होकर बागपत, शामली होते हुए सहारनपुर से गुजरती है। जिसकी लंबाई करीब 206 किमी. है।
इसलिए केन्द्र ने राज्य सरकार से अनापत्ति देने का अनुरोध किया था। एनओसी देने से संबंधित प्रस्ताव पर सरकार ने कैबिनेट में मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार से अनापत्ति मिलने के बाद केन्द्र जल्द ही इस मार्ग राष्ट्रीय राज मार्ग बनाने की घोषणा कर सकता है।
पांचवां फैसला- सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों पर कार्रवाई कर सकेंगे एमडी
- फोटो : amar ujala
सरकार ने सहकारी संस्थाओं के अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई का अधिकार प्रबंध समितियों से लेकर प्रबंध निदेशकों को देने का फैसला किया है। इसके लिए अध्यादेश लाया जाएगा। इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट में मंजूरी दे दी गई। माना जा रहा है कि शीर्ष सहकारी संस्थाओं में सपा के वर्चस्व को तोड़ने की रणनीति के तहत यह फैसला किया गया है। अब तक इन संस्थाओं की प्रबंध समितियों में सपा के लोगों का दबदबा होने से प्रदेश सरकार इनके अधिकारियों व कर्मचारियों पर न तो कार्रवाई कर पा रही है और न ही स्थानांतरण।
यह लाया गया प्रस्ताव
प्रस्ताव में कहा गया है कि सहकारी समितियां किसानों को खाद के साथ भी ऋण उपलब्ध कराती हैं। लेकिन समितियों की प्रबंध कमेटियों का चुनाव न हो पाने, कमेटी के त्यागपत्र दे देने अथवा अन्य आकस्मिक स्थिति में व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो जाती है। शीर्ष संस्था का कोई कर्मचारी गड़बड़ी करता है अथवा अनियमितता करता है तो भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। जबकि वित्तीय अनियमितता के मामलों में जिनमें तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है, वे भी नहीं हो पाती है। इसलिए संस्था के कर्मचारियों का स्थानांतरण, निलंबन करना और अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार शीर्ष संस्था के प्रबंध निदेशक को दिया जाना उचित रहेगा। इसके लिए सहकारी समिति अधिनियम-1965 की धारा -29 एवं 31 में संशोधन किया जाना जरूरी है। इसके लिए एक अध्यादेश लाया जाए और विधानमंडल के समक्ष प्रस्ताव लाकर नियमों को संशोधित कर दिया जाए।
कारण यह तो नहीं
शीर्ष सहकारी संस्थाओं में सपा सरकार के समय निर्वाचित प्रबंध समितियां काम कर रही हैं। सरकार की समस्या यह है कि इन समितियों के प्रभावी रहने से सरकार अपने तरीके से यहां पर निर्णय नहीं ले पा रही है। वैसे तो सहकारी समितियों के चुनाव घोषित हो चुके हैं। लेकिन शीर्ष सहकारी संस्थाओं का कार्यकाल 2019 तक है। लोकसभा के चुनाव भी 2019 में हैं। सरकार को लगता है कि तब तक सपा के वर्चस्व में चलने वाली संस्थाओं से उसका नुकसान हो सकता है। माना जाता है कि इसीलिए सरकार ने ये प्रस्ताव पारित कराया है।