नये कानून के लागू होने के बाद किरायेदार और मालिक के बीच लिखित अनुबंध करना अनिवार्य होगा। मकान मालिक को तीन माह के भीतर अनुबंध पत्र किराया प्राधिकरण में जमा करना होगा। पहले से रखे गए किराएदारों के मामले में यदि लिखित अनुबंध नहीं है तो लिखित अनुबंध करने के लिए लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा। किरायेदार के लिए नियम होगा कि उसे रहने वाले स्थल की देखभाल करनी होगी। किरायेदार घर में बिना पूछे तोड़फोड़ भी नहीं कर पाएगा। किराएदारी अनुबंध पत्र की मूलप्रति का एक-एक सेट दोनों के पास रहेगा। मकान मालिक को किराएदार को इसकी रसीद देनी होगी। मकान मलिक को जरूरी सेवाएं देनी होंगी। मकान मालिक किराएदार को अनुबंध अवधि में बेदखल नहीं कर सकेगा।
साल में 5 से सात फीसदी ही बढ़ा पाएंगे किराया
कानून में यह प्रावधान किया गया है कि आवासीय भवनों के किराये में पांच फीसदी और गैर आवासीय भवनों के किराये में प्रतिवर्ष सात फीसदी ही किराया बढ़ाया जा सकेगा। किराया वृद्धि की गणना चक्रवृद्धि आधार पर होगी। अगर वो दो माह किराया नहीं दे पाएगा तो उसके मकान मालिक हटा सकेगा। एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपाजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा और गैर आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।
विवाद निस्तारण के लिए गठित होगा प्राधिकरण
मकान मालिक व किरायेदार के बीच किसी भी तरह केविवादों के निस्तारण के लिए किराया प्राधिकरण एवं रेंट ट्रिब्यूनल का भी गठन किया जाएगा। प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह किराया बढ़ाने के विवाद पर किराया दर को संशोधित कर सकेगा और किरायेदार द्वारा देय अन्य शुल्क का भी निर्धारण कर सकता है। किराया प्राधिकरण एक यूनिट आईडेंटीफिकेशन नंबर देगा और सूचना की तिथि से सात दिन के अंदर अपनी वेबसाइट पर किराएदारी की सूचना को अपलोड करेगा।
किराएदारी की अवधि निर्धारित होगी
किरायेदारी की अवधि का निर्धारण और नवीनीकरण मकान मालिक और किरायेदार के बीच किया जाएगा। यह अनुबंध पत्रों की शर्तों के आधार पर होगा। मृत्यु के मामले में उत्तराधिकारियों के अधिकार अनुबंध पत्र की शर्तें मकान मालिक के साथ-साथ किरायेदार के उत्तराधिकारियों पर भी लागू होगी।
प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में भी लागू करने का फैसला किया है। सरकार ने इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना अभी तक औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लागू नहीं थी। अब इसे औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लागू करने का फैसला हुआ है। सरकार प्राधिकरण क्षेत्र में घर की डिमांड का आकलन करेगी। इसके बाद पात्र आवेदकों को आवास उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
प्रत्येक आवासीय योजना में न्यूनतम 250 भवन होंगे। इसमें 35 प्रतिशत क्षेत्रफल पर दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के भवनों का निर्माण किया जाना है। विकासकर्ता द्वारा प्रति ईडब्ल्यूएस अवास पर 22.77 वर्ग मीटर कारपेट एरिया के लिए 6 लाख तथा 22.77 वर्ग मीटर से 30 वर्ग मीटर के कारपेट एरिया के भवनों के लिए प्रो-रोटा क्षेत्रफल के आधार पर न्यूनतम सीलिंग कास्ट रखने का प्रावधान किया जा रहा है।
योजना के अंतर्गत विकासकर्ता को 2.50 लाख रुपये अनुदान मिलेगा। इसमें 1.5 लाख केंद्र सरकार से केंद्रांश के रूप में जबकि 1 लाख रुपये राज्यांश के रूप में मिलेगा। अपर मुख्य सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने कहा है कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में पीएम आवास योजना लागू होने से एनसीआर क्षेत्र के गरीब परिवारों की आवासीय समस्या दूर होगी।