मनीष के मुताबिक 1.75 करोड़ रुपये उन्हाेंने कई किस्तों में दिया। इस रकम में 5370000 रुपये नीरज पांडेय के खाते में जमा कराया। इसके अलावा 67 लाख रुपये लखीमपुर खीरी के नई बस्ती निवासी अनूप श्रीवास्तव के खाते में जमा कराया। वहीं 44.55 लाख रुपये कई बार में नकदी सुपुर्द किया। मनीष का आरोप है कि रुपये लेने के लिए जालसाज दबाव बना रहे थे। अंतिम बार 15 लाख रुपये खाते मे जमा कराया। इसके लिए पहले जालसाजों ने धमकी दी कि अगर एक दिन के अंदर 15 लाख रुपये नहीं मिले तो किसी की नियुक्ति नहीं होगी। रकम मिलने के तीसरे दिन सभी को नियुक्ति पत्र सौंप दिया जाएगा। लेकिन रकम मिलने के बाद वह बार-बार टालमटोल करते रहे। इसके बाद पिछले साल कोविड संक्रमण के कारण लॉक डाउन हो गया। इस दौरान भी वह जालसाजों से लगातार संपर्क करते रहे। लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। जनवरी 2021 में अभिषेक पॉलीट ेकिभनक चोराहे परमिला। मनीष ने दबाव बनाया तो उसने पूरी रकम वापस करने को कहा। इसकेलिए दस दिन का समय मांगा था। लेकिन वहां से छूटने के बाद वह धमकी देने लगा।
पकड़ाया फर्जी नियुक्ति पत्र, कराया प्रशिक्षण
मनीष का आरोप है कि जालसाजों ने सभी अभ्यर्थियों को फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ाया। इसकेलिए उन्होंने ग्रेटर नोएडा के होटल एवा ग्रीन में कुछ अभ्यर्थियों को बुलाया। जिनकी नियुक्ति नोएडा और दिल्ली में देने की बात कही थी। इन सभी को वहीं पर एफसीआई के सील लगे लिफाफे में नियुक्ति पत्र पकड़ाया। इसके अलावा कुछ लोगों को विभूतिखंड थाने के पास स्थित एफसीआई के मुख्यालय पर पहुंचकर बाहर नियुक्ति पत्र दिया। मनीष के मुताबिक सभी नियुक्ति पत्र पर बार कोड था। ताकि किसी को ठगी का अहसास न हो। जालसाजों ने अभ्यर्थियों को दिल्ली, नोएडा, गोरखपुर, बस्ती, हापुड़, बलिया, कानपुर सहित कई जिलों में तैनाती का पत्र दिया था। जब वहां पहुंचे तो नियुक्ति पत्र फर्जी निकला। इन जिलों में तैनात अधिकारियों ने जैसे ही नियुक्ति पत्र के बार कोड को स्कैन किया तो वह जाली मिले। इसके बाद अभ्यर्थियों को फटकार लगाकर वापस भेज दिया। आरोप है कि जालसाजों ने नियुक्ति के पहले सभी का प्रशिक्षण भी कराया था। इसके लिए ग्रेटर नोएडा के होटल में ठहरने का इंतजाम किया। वहीं से साजिश के तहत एक गोदाम में ले जाकर सभी को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान किसी भी अभ्यर्थी को रुपये नहीं दिये गये। ट्रेनिंग के दौरान रजिस्टर भरवाया जाता था। यह सिलसिला छह महीनों तक चलता रहा।
पूरे देश में फैला है नेटवर्क, सौ से अधिक से कर चुके है ठगी
इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। खासकर यह गिरोह पूर्वांचल, बिहार, झारखंड के बेरोजगार युवकों को निशाना बनाता है। इन प्रदेशों में इनका नेटवर्क फैला है। जिन जालसाजों पर आरोप है। उसमें सभी लखनऊ, नोएडा, लखीमपुर खीरी के रहने वाले है। इसमें जवाहर भवन लखनऊ में काम करने वाला एक कर्मचारी राकेश सिंह, रवि प्रकाश सिंह, ग्रेटर नोएडा निवासी राजन चौबे उर्फ विक्की चौबे, उनकी पत्नी कविता चौबे, लखीमपुर खीरी का अनूप श्रीवास्तव, उसका भाई संजू श्रीवास्तव, सुल्तानपुर का अभिषेक दुबे, खीरी का राज रस्तोगी, जितेंद्र, अमरेंद्र सिंह और विकासनगर का नीरज पांडेय शामिल हैं। मनीष के मुताबिक तहरीर में एक और नीरज पांडेय का नाम है। जो गलती से लिख गया था।
अनूप व नीरज है गिरोह के सरगना
प्रभारी निरीक्षक महानगर प्रदीप सिंह के मुताबिक मनीष राय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का सरगना अनूप श्रीवास्तव व नीरज पांडेय हैं। अभिषेक, संजू, राकेश, राजन चौबे, कविता व अन्य सदस्य लोगों को झांसा देकर वसूली करने में मदद करते हैं। पुलिस ने मनीष के जरिए कई आरोपियों के मोबाइल नंबर व अन्य जरूरी जानकारी हासिल कर ली है। गिरोह केसभी सदस्यों की कुंडली खंगाली जा रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।