समाज कल्याण विभाग में मृतक आश्रित कोटे में गलत ढंग से नौकरी पाने वाले दो स्थायी कर्मियों प्रदीप कुमार और संजय सिंह यादव को बर्खास्त कर दिया गया है। कनिष्ठ सहायक के पद पर नियुक्त हुए ये कर्मी पदोन्नति पाकर प्रधान सहायक बन चुके थे। दोनों करीब 20 साल से नौकरी कर रहे थे। उनके मां-बाप दोनों ही सरकारी सेवा में थे। इसलिए मृतक आश्रित के तौर पर उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा सकती थी।
अमर उजाला ने मृतक आश्रित कोटे में फर्जी ढंग से नौकरी देने का मामला प्रमुखता से उठाया था। वर्ष 2000 और 2001 में मृतक आश्रित कोटे में कनिष्ठ सहायक के पद पर प्रदीप कुमार और संजय यादव को नियुक्ति दी गई थी। प्रदीप के माता-पिता दोनों ही समाज कल्याण विभाग में नौकरी करते थे। मां का निधन होने पर उन्हें इस कोटे का लाभ दिया गया। संजय को समाज कल्याण विभाग में सेवारत उनके पिता के निधन के बाद नौकरी दी गई।
जब संजय को नियुक्ति दी गई, तब उनकी मां भी सरकारी सेवा में थीं। इन दोनों ही मामलों की जांच उप निदेशक, समाज कल्याण जे राम को दी गई थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में प्रदीप और संजय की नियुक्ति को शासनादेश के विपरीत बताई। साथ ही उन्हें नियुक्ति देने वाले अफसरों को भी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया। उनकी इस रिपोर्ट से पहले भी समाज कल्याण विभाग में मृतक आश्रित के रूप में फर्जी ढंग से नियुक्ति पाने पर दो कर्मचारियों को बर्खास्त किया जा चुका है।
ये है नियम
वर्ष 1999 के शासनादेश के अनुसार, माता-पिता दोनों के सरकारी सेवा में होने और उनमें से किसी एक का निधन होने पर मृतक आश्रित कोटे का लाभ नहीं मिल सकता है।
वर्जन...
प्रदीप कुमार और संजय सिंह यादव को शासनादेश के विपरीत नौकरी दी गई थी। इसलिए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
- राकेश कुमार, निदेशक, समाज कल्याण