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डॉक्टरों के चक्कर लगाकर मर गया डेंगू की चपेट में आया ये उभरता कलाकार

Tue, 04 Oct 2016 12:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अतुल स‌िंह राजपूत (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल से लेकर ट्रॉमा सेंटर और देवकी, नीरा नर्सिंग होम और मेयो अस्पताल तक की लापरवाही और डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने रविवार को तहजीब के शहर पर एक और बदनुमा दाग लगा दिया। 
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इन लोगों ने बापू की जयंती पर नाटक का मंचन करने आए डेंगू पीड़ित अतुल सिंह राजपूत (22) को इलाज के लिए दौड़ा-दौड़ा कर मौत की नींद सुला दिया। बालाजी टेलीफिल्म के कई धारावाहिकों को निर्देशन कर चुके अतुल का शव उनके गृह जनपद सागर भेज दिया गया है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर रविवार को गांधी भवन सभागार में अखिल भारतीय सांस्कृतिक संस्थान की ओर से दो नाटकों का मंचन होना था, लेकिन इससे पहले ही ‘बरमुडा ट्राइंगल’ नाटक के कलाकार अतुल सिंह राजपूत का देहांत हो गया। 
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अतुल मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर के रहने वाले हैं और लंबे समय से मुंबई में रह रहे थे। नाटक के निर्देशक राजेंद्र राजपूत ने बताया कि अतुल को डेंगू को था। शनिवार रात करीब डेढ़ बजे अतुल की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें बलरामपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से इंजेक्शन लगाकर वापस भेज दिया गया।

सुबह अतुल को दोबारा बलरामपुर ले जाया गया लेकिन बेड की कमी का हवाला देकर उन्हें एडमिट नहीं किया गया। देवकी नर्सिंग होम व नीरा नर्सिंग होम ने भी भर्ती करने से मना कर दिया गया। थक-हारकर वापस बलरामपुर लौटे तो डॉक्टरों ने वेंटिलेटर न होने की बात कहकर ट्रॉमा रेफर कर दिया। 
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सदमे में साथी कलाकार

डेमो प‌िक
ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने कह दिया कि वेंटिलेटर खाली नहीं है। इसके बाद बमुश्किल अतुल को मेयो अस्पताल में भर्ती तो कराया लेकिन उचित इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई। इसके बाद अतुल के भाई को मध्य प्रदेश से बुलाकर शव सौंप दिया गया। सोमवार को एक श्रद्धांजलि सभा कर कलाकारों ने अतुल को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

‘बरमुडा ट्राइंगल’ नाटक का मंचन अतुल सिंह राजपूत का देहांत होने के कारण रविवार को कैंसिल कर दिया गया। निर्देशक ने बताया कि दोनों नाटक सांप्रदायिक शक्तियों पर प्रहार करने वाले थे, जिसमें अतुल की मुख्य भूमिका थी।  अतुल की मौत के बाद मंचन कैंसिल होने से नाटक के अन्य कलाकार सदमे में हैं।22 वर्षीय अतुल सिंह राजपूत ने मध्य प्रदेश में रंगमंच से मुंबई तक का सफर तय किया था।  
उन्होंने एक ओर जहां दर्जनों नाटकों में अभिनय किया था, वहीं बालाजी टेलीफिल्म्स के कई नाटकों में सह निर्देशक रहे, जिसमें से ‘ये हैं मोहब्बतें...’ प्रमुख सीरियल है। यही नहीं यूपी की पृष्ठभूमि पर बनने वाली फिल्म में भी वह अभिनय करने वाले थे।
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