सराकर ने स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में नियम विरुद्ध तबादले की शिकायतों पर 350 से अधिक तबादले रद्द कर दिए। मगर, सरकार की छवि खराब करने वाले तबादलों के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में स्थानांतरण नीति को नजरअंदाज कर बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के स्थानांतरण नीति बनाकर समूह ‘ख’ से ‘घ’ तक के तबादले किए गए। जिन तबादलों का अधिकार महानिरीक्षक स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन को था, वे तबादले उन्हें दरकिनार करके किए गए।
तबादलों में मनमानी व भ्रष्टाचार की शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचीं तो उन्होंने सभी 350 से अधिक तबादले रद्द करवा दिए। अब सवाल उठाया जा रहा है कि जब गड़बड़ी साबित होने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तबादले रद्द किए गए तो फिर इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
लगातार दूसरा साल है जब विभागीय मंत्री और शासन के अफसरों की वजह से विभाग में तबादले नहीं हो पाए। सरकार की तबादला नीति समय से जारी होने के बावजूद उस पर अमल नहीं किया गया।