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स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के तबादले रद्द, लेकिन मनमानी करने वालों पर कार्रवाई नहीं

Sun, 18 Aug 2019 01:13 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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सराकर ने स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में नियम विरुद्ध तबादले की शिकायतों पर 350 से अधिक तबादले रद्द कर दिए। मगर, सरकार की छवि खराब करने वाले तबादलों के लिए जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में स्थानांतरण नीति को नजरअंदाज कर बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के स्थानांतरण नीति बनाकर समूह ‘ख’ से ‘घ’ तक के तबादले किए गए। जिन तबादलों का अधिकार महानिरीक्षक स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन को था, वे तबादले उन्हें दरकिनार करके किए गए। 

तबादलों में मनमानी व भ्रष्टाचार की शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचीं तो उन्होंने सभी 350 से अधिक तबादले रद्द करवा दिए। अब सवाल उठाया जा रहा है कि जब गड़बड़ी साबित होने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तबादले रद्द किए गए तो फिर इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
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लगातार दूसरा साल है जब विभागीय मंत्री और शासन के अफसरों की वजह से विभाग में तबादले नहीं हो पाए। सरकार की तबादला नीति समय से जारी होने के बावजूद उस पर अमल नहीं किया गया।
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स्वास्थ्य विभाग के तबादलों में जांच को कमेटी बनी, कार्रवाई अटकी

बीते जून में स्वास्थ्य विभाग में पैरामेडिकल स्टाफ के तबादले किए गए। इन तबादलों में भ्रष्टाचार से लेकर मनमानी के गंभीर आरोप लगाए गए। पिछले महीने मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकायतों की जांच के लिए समिति का गठन किया। समिति से चार दिन में रिपोर्ट मांगी गई। बताया जा रहा है कि समिति विभाग को रिपोर्ट सौंप चुकी है, मगर कार्रवाई नहीं की जा रही। 
 
अभियान खत्म, पर बीएसए व सीएमओ के तबादलों का स्थगन खत्म नहीं
बेसिक शिक्षा विभाग ने 28 जून को में 15 शिक्षा अधिकारियों के तबादले किए। इनमें बेसिक शिक्षा अधिकारी शामिल थे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग ने 29 जून को सीएमओ व सीएमएस के तबादले किए, मगर अचानक इन तबादलों को क्रमश: स्कूल चलो अभियान व संचारी रोग अभियान का हवाला देकर स्थगित कर दिया गया। 

ये दोनों ही अभियान 31 जुलाई को समाप्त हो चुके हैं, मगर स्थगित तबादलों के बारे में चुप्पी बनी हुई है। अब इन तबादलों को लेकर कोई अन्य वास्तविक वजह होने की बात की जा रही है और तरह-तरह की वजहें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इससे विभाग से लेकर सरकार तक की किरकिरी हो रही है।
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