तिवारी ने बताया कि परिषद के पदाधिकारियों की शुक्रवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से बातचीत हुई। उन्होंने आश्वस्त किया है कि न्यायालय की रोक से पहले यदि किसी कर्मचारी व अधिकारी ने निजी चिकित्सालय से इलाज कराया है और उसके खर्च की प्रतिपूर्ति नहीं हुई है, ऐसे मामलों में इलाज की प्रतिपूर्ति का आदेश अगले सप्ताह जारी हो जाएगा।
तिवारी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को बताया था कि राज्य कर्मचारियों एवं अधिकारियों को बीमारी में आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति विभागीय निर्धारित प्रक्रिया के तहत वर्षों से होती रही है। पिछले दिनों किसी व्यक्तिगत प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने निजी चिकित्सालयों में इलाज कराने पर प्रतिपूर्ति न करने के निर्देश दे दिए। निर्देश किसी व्यक्तिगत मामले में था लेकिन कार्मिक विभाग ने उस निर्देश पर सभी कर्मचारियों की निजी चिकित्सालयों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर रोक लगा दी। एक ओर ‘कैशलेस इलाज’ का वादा पूरा नहीं हुआ है और कर्मचारियों व अधिकारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति भी बंद करा दी।