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UP Election 2022: सपा की प्रदेश कार्यकारिणी व अनुसूचित मोर्चे पर टिकीं निगाहें, जोड़तोड़ में जुटे वरिष्ठ नेता

Mon, 18 Oct 2021 05:31 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सपा के वरिष्ठ नेताओं की प्रदेश कार्यकारिणी और अनुसूचित मोर्चे में जगह पाने के लिए कोशिशें जारी हैं। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता जोड़तोड़ में जुटे हुए हैं।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी में प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा को लेकर नई उम्मीद जगी है। ऐसे में संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए आतुर पार्टी के वरिष्ठ नेता जोड़तोड़ में लग गए हैं। उधर, अनुसूचित जाति मोर्चे के लिए भी पार्टी नेतृत्व की परिक्रमा तेज हो गई है।

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अभी तक अल्पसंख्यक सभा को लेकर समाज के कई सियासी और तामीली घरानों के बीच जोर आजमाइश चल रही थी। अंतत: हाईकमान ने दशहरा पर अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय व प्रदेश अध्यक्ष, बाबा साहब वाहिनी और छात्रसभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर उन्हें कार्यकारिणी गठित करने के निर्देश दिए हैं। अब नेताओं की निगाहें अनुसूचित जाति मोर्चे के अध्यक्ष पद पर हैं।

खासतौर से बसपा छोड़ कर सपा में आने वाले नेताओं में होड़ लगी है। इसमें अनुसूचित जाति के कई ऐसे नेता हैं, जो जमीनी स्तर पर दलितों के बीच संगठनात्मक कार्य का लंबा अनुभव रखते हैं। बसपा से सपा में आने वालों का तर्क है कि ऐसे लोगों को जिम्मेदारी मिली तो पार्टी के पक्ष में दलित वोट बैंक को गोलबंद करना आसान होगा।
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अल्पसंख्यक सभा में बढ़े भागीदारी
अल्पसंख्यक सभा का अध्यक्ष मुस्लिम समुदाय से है, लेकिन पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं का तर्क है कि भाजपा से मुकाबला करने के लिए अल्पसंख्यक सभा में सिख, पारसी, बौद्ध, क्रिश्चियन, जैन, सिंधी को भी भागीदारी देनी होगी। सपा में अलग-अलग समुदाय के कई वरिष्ठ नेता भी हैं। अल्पसंख्यक सभा अध्यक्ष की घोषणा होने के बाद रविवार को इन समुदाय के नेताओं की पार्टी कार्यालय में भीड़ भी देखी गई है।

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दिग्गजों की निगाह प्रदेश कार्यकारिणी पर

प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल कार्यालय से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक पसीना बहा रहे हैं लेकिन अभी तक प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा नहीं होने से सभी की निगाहें इसी पर टिकी हैं। तमाम नेता कार्यकारिणी में खुद को शामिल कराने के लिए बेताब हैं।

रविवार को पार्टी के रणनीतिकारों में शुमार नेताओं के इर्द-गिर्द परिक्रमा करते नजर आए। विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर बुलाई गई विधायकों की बैठक से पहले भी इस मुद्दे पर गुफ्तगू हुई। कई विधायक अपने बीच वरिष्ठ विधायकों को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल करने के कयास लगाते रहे, लेकिन कोई खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
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