उत्तर प्रदेश शुगर मिल एसोसिएशन के महासचिव दीपक गुप्ता के मुताबिक प्रदेश में 43 इकाइयां शीरे से एथनॉल बनाती हैं। सरकार ने नई प्रोत्साहन नीति लागू की तो 17 नए प्रोजेक्टों पर और काम हो रहा है तथा सात हजार करोड़ रुपये इन्वेस्ट किया जा रहा है। अब यह इन्वेस्टमेंट फंस जाएगा। बैंक भी फंडिंग रोक देंगे। उन्होंने कहा कि यह यूपी के लिए बड़ा झटका है। बताया कि उप्र. शुगर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष सीबी पटौदिया ने इस बाबत खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय भारत सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी (शुगर) को पत्र भेजा है और इस सारी स्थिति से अवगत कराते हुए इस टेंडर में यूपी को भी शामिल करने की मांग की है। साथ ही इस बाबत यूपी सरकार से भी बात की जा रही है।
पहले बिजली उत्पादन में मिली चोट
शुगर इंडस्ट्री को पहले बिजली उत्पादन से झटका लग चुका है। एसोसिएशन के महासचिव के मुताबिक शुगर इंडस्ट्री ने सरकारी प्रोत्साहन पर 1500 मेगावाट का को-जेनरेशन प्लांट लगाया गया था। पहले उसका टैरिफ 5 रुपये यूनिट था जो घटाकर दो रुपये अस्सी पैसे कर दिया गया। इसी से इंडस्ट्री को एक हजार करोड़ रुपये की मार पड़ी।
शुगर को मात्र पांच अंक, अनाज को बीस
ऑयल कंपनियों ने निविदा के लिए एथनॉल खरीद के लिए जो वरीयता सूची बनाई है उसके लिए अंक देने का प्रावधान रखा गया है। 50 अंक इसके लिए पूर्णांक है। इसमें मक्का आदि से एथनॉल बनाने वाली इकाइयों को बीस अंक, मक्का और चावल के कॉम्बिनेशन को 15, केवल चावल को दस तथा इसके अलावा अन्य जैसे शीरा आदि से एथनॉल बनाने वाली इकाइयों को केवल पांच अंक दिए जाएंगे। अब यूपी पूरी तरह से शुगर एवं अन्य में शामिल है। ऐसे में यहां की इकाइयों को पांच अंक ही मिलेंगे और वह टेंडर की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेगा।