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अब सामान्य और अल्पसंख्यक छात्रों को भी स्कॉलरशिप देगी योगी सरकार

Tue, 12 Dec 2017 04:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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छात्रवृत्ति
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सामान्य व अल्पसंख्यक छात्रों को भी मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई होगी। इसके लिए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नियमावली में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं।
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समाज कल्याण निदेशालय ने इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है। दिसंबर में ही प्रस्तावित नई नियमावली शासन को भेज दी जाएगी।

हाल ही में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संशोधित नियमावली जारी की गई है। इसके अनुसार, अन्य पिछड़ा वर्ग के उन्हीं छात्रों को छात्रवृत्ति मिलेगी, जिन्होंने गत वर्ष की परीक्षा न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की हो।

इसमें यह भी कहा गया है कि कक्षा-11 व 12 के अतिरिक्त दशमोत्तर पाठ्यक्रमों में अगर मानक के आधार पर राशि कम पड़ती है तो बजट की सीमा में यह प्रतिशत 50 से अधिक भी हो सकता है।
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अगर राशि बचती है तो कक्षा-11 व 12 के 50 प्रतिशत से कम अंक पाने वालों को भी योजना का लाभ दिया जाएगा। इसी तरह से कक्षा-11 व 12 को छोड़कर अन्य दशमोत्तर पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत उन छात्रों को शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ दिया जाएगा, जिन्होंने पिछली कक्षा में न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक हासिल किए हों।

इस मद में बजट कम पड़ने पर न्यूनतम प्रतिशत 65 से अधिक भी हो सकता है। वहीं बजट बचने पर न्यूनतम प्रतिशत 65 से कम भी हो सकता है, पर किसी भी दशा में यह 50 प्रतिशत से कम नहीं होगा।

इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों में शुल्क भरपाई की अधिकतम सीमा 10 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक तय की गई है।
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नियमों में एकरूपता लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अन्य पिछड़ा वर्ग की नई नियमावली पर हस्ताक्षर करने के साथ ही उसी फाइल पर यह भी लिखा कि समाज कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से भी इसी तर्ज पर नियमावली तैयार करने की अपेक्षा की जाती है।

यहां बता दें कि अब सरकार की एक ही योजना में अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग नियम हो गए हैं। जहां पिछड़ा वर्ग का विद्यार्थी 50 फीसदी से कम अंक होने पर शुल्क भरपाई योजना का लाभ नहीं ले सकेगा, वहीं सामान्य व अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थी 33 फीसदी अंक होने पर भी बजट उपलब्ध होने पर योजना का लाभ पाएंगे।

इसे ध्यान में रखते हुए ही सीएम ने नियमों में एकरूपता लाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों के लिए इस मद में केंद्र सरकार राशि देती है, इसलिए अधिकारियों का कहना है कि उनके मामले में नियमों में संशोधन नहीं किया जाएगा।

समाज कल्याण विभाग का कहना है कि संशोधित नियमावली का प्रस्ताव तैयार करवाया जा रहा है। अंतिम मुहर मुख्यमंत्री ही लगाएंगे। 
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