सार
रोबोटिक सर्जरी विधि में ऑपरेटिंग सिस्टम डॉक्टरों के हाथ में होता है, लेकिन सारा काम रोबोट करता है। ऐसे ऑपरेशन, जिनमें बेहद छोटा चीरा लगाना होता है, उसमें रोबोटिक सर्जरी बेहद कारगर है। रोबोट के जरिये छोटे से छोटे चीरे से भी सर्जरी की जा सकती है।
केजीएमयू में नए साल से मरीजों को सस्ती दर पर रोबोटिक सर्जरी का लाभ देने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, दो से तीन महीने में टेंडर के बाद उपकरण ले लिए जाएंगे। इसके बाद केजीएमयू भी रोबोटिक सर्जरी वाले संस्थानों में शामिल हो जाएगा। कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी की महत्वाकांक्षी योजना में रोबोटिक सर्जरी को शामिल किया गया था।
मालूम हो कि कोरोना की वजह से रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की योजना अधर में लटक गई थी। संक्रमण थमने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने इस दिशा में फिर से काम शुरू करते हुए शासन को 35 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा। इसकी मंजूरी मिलने के बाद अब केजीएमयू टेंडर प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इसके आधार पर ही जरूरी मशीन और उपकरण लगाए जाएंगे। टेंडर के बाद यह प्रक्रिया दो से तीन महीने में पूरी होने की संभावना है।
जटिल सर्जरी में ज्यादा कारगर
रोबोटिक सर्जरी विधि में ऑपरेटिंग सिस्टम डॉक्टरों के हाथ में होता है, लेकिन सारा काम रोबोट करता है। ऐसे ऑपरेशन, जिनमें बेहद छोटा चीरा लगाना होता है, उसमें रोबोटिक सर्जरी बेहद कारगर है। रोबोट के जरिये छोटे से छोटे चीरे से भी सर्जरी की जा सकती है। रोबोट में अत्याधुनिक उपकरण और कैमरा लगा होता है। रोबोटिक सर्जरी साधारण सर्जरी के मुकाबले कहीं ज्यादा सटीक होती है। इसलिए न्यूरो, ऑर्थो और कार्डियक समेत अन्य विभाग की सर्जरी में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। विदेशों में रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल साधारण के मुकाबले कहीं ज्यादा होता है। सामान्य सर्जरी के मुकाबले यह थोड़ी महंगी होती है, लेकिन इसकी सफलता दर ज्यादा है।
रोबोटिक सर्जरी शुरू करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इस समय टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसमें न्यूनतम कीमत वाली कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। उम्मीद है कि अगले कुछ महीने में केजीएमयू में इसकी शुरुआत हो जाएगी।
डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता केजीएमयू