यूपी समेत कई प्रदेशों को बिजली से रोशन करने वाले एनटीपीसी के शहर रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपनी किस्मत चमकाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने के बाद यह सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है। सपा में हैट्रिक लगाने की बेताबी है, तो उसका विजय रथ रोकने के लिए भाजपा स्टार प्रचारकों और जातीय समीकरणों के भरोसे है। वहीं, नए चेहरे के जरिये बसपा और दल बदलकर आए कांग्रेस प्रत्याशी भी सियासी जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा और सपा में स्थानीय बनाम बाहरी का नारा भी फिजा में गूंज रहा है। इस सीट पर अब तक कांग्रेस, सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है।
कभी यह सीट कांग्रेस का गढ़ थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी रहे कुंवर हरनारायण सिंह पांच बार और उनके बेटे अजयपाल सिंह एक बार विधायक रहे। स्वामी प्रसाद मौर्य दो बार बसपा से, तो सपा के डॉ. मनोज कुमार पांडेय 2012 और 2017 में किला फतह कर चुके हैं। पांडेय के खिलाफ स्वामी के बेटे उत्कर्ष एक बार बसपा तो एक बार भाजपा से लड़े, लेकिन जीत नहीं दिला पाए। स्वामी के सपा में जाने के बाद इस सीट पर भाजपा ने पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के रहने वाले अमरपाल मौर्य को उतार कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह पिछड़ों की हिमायती है। वहीं, मनोज पांडेय सपा के परंपरागत वोटर यादव, मुस्लिम के साथ ब्राह्मण व अन्य वर्गों को जोड़कर और विकास के काम गिनाकर तीसरी बार विधायक बनने का सपना संजोए हैं।