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ऊंचाहार : सपा की हैट्रिक रोकने के लिए भाजपा ने लगाया दम, बसपा-कांग्रेस तलाश रहे जमीन

अशोक शर्मा, अमर उजाला, रायबरेली Published by: ishwar ashish Updated Thu, 17 Feb 2022 11:31 AM IST

सार

रायबरेली की ऊंचाहार सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार मनोज कुमार पांडेय ने भाजपा प्रत्याशी को करीब दो हजार वोटों से हराया था। सपा इस बार यहां हैट्रिक की की कोशिश में है।
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सपाः मनोज पांडेय, कांग्रेसः अतुल सिंह, भाजपाः अमरपाल मौर्य, बसपाः अंजलि मौर्य। - फोटो : amar ujala

यूपी समेत कई प्रदेशों को बिजली से रोशन करने वाले एनटीपीसी के शहर रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपनी किस्मत चमकाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने के बाद यह सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है। सपा में हैट्रिक लगाने की बेताबी है, तो उसका विजय रथ रोकने के लिए भाजपा स्टार प्रचारकों और जातीय समीकरणों के भरोसे है। वहीं, नए चेहरे के जरिये बसपा और दल बदलकर आए कांग्रेस प्रत्याशी भी सियासी जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा और सपा में स्थानीय बनाम बाहरी का नारा भी फिजा में गूंज रहा है। इस सीट पर अब तक कांग्रेस, सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है।

कभी यह सीट कांग्रेस का गढ़ थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी रहे कुंवर हरनारायण सिंह पांच बार और उनके बेटे अजयपाल सिंह एक बार विधायक रहे। स्वामी प्रसाद मौर्य दो बार बसपा से, तो सपा के डॉ. मनोज कुमार पांडेय 2012 और 2017 में किला फतह कर चुके हैं। पांडेय के खिलाफ स्वामी के बेटे उत्कर्ष एक बार बसपा तो एक बार भाजपा से लड़े, लेकिन जीत नहीं दिला पाए। स्वामी के सपा में जाने के बाद इस सीट पर भाजपा ने पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के रहने वाले अमरपाल मौर्य को उतार कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह पिछड़ों की हिमायती है। वहीं, मनोज पांडेय सपा के परंपरागत वोटर यादव, मुस्लिम के साथ ब्राह्मण व अन्य वर्गों को जोड़कर और विकास के काम गिनाकर तीसरी बार विधायक बनने का सपना संजोए हैं।



बाहरी के जवाब में अमरपाल यह कहकर चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में हैं कि अब सब कुछ हमारा इसी क्षेत्र में है। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजयपाल सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़े तो पार्टी ने भाजपा से आए अतुल सिंह को टिकट दे दिया। भाजपा से टिकट न मिलने पर अतुल ने पाला बदल लिया था। वे पहली बार सियासी मैदान में उतरे हैं। वहीं, बसपा ने अंजलि मौर्य के रूप में नया चेहरा उतारा है। वे पिछड़ों के भरोसे खुद को मजबूत मान रही हैं।

यहां चौथे चरण में 23 फरवरी को मतदान होना है। मतदान का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, चुनाव भाजपा और सपा के बीच सिमटता जा रहा है। परंपरागत वोट और जातीय समीकरण में उलझी इस सीट के जातीय समीकरणों को जो सुलझा लेगा, वही यहां का शहंशाह बनेगा।

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सपाः मनोज पांडेय, कांग्रेसः अतुल सिंह, भाजपाः अमरपाल मौर्य, बसपाः अंजलि मौर्य। - फोटो : amar ujala
यूपी समेत कई प्रदेशों को बिजली से रोशन करने वाले एनटीपीसी के शहर रायबरेली के ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपनी किस्मत चमकाने के लिए पूरा जोर लगा रही है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने के बाद यह सीट अचानक सुर्खियों में आ गई है। सपा में हैट्रिक लगाने की बेताबी है, तो उसका विजय रथ रोकने के लिए भाजपा स्टार प्रचारकों और जातीय समीकरणों के भरोसे है। वहीं, नए चेहरे के जरिये बसपा और दल बदलकर आए कांग्रेस प्रत्याशी भी सियासी जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं। भाजपा और सपा में स्थानीय बनाम बाहरी का नारा भी फिजा में गूंज रहा है। इस सीट पर अब तक कांग्रेस, सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है।

कभी यह सीट कांग्रेस का गढ़ थी। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीबी रहे कुंवर हरनारायण सिंह पांच बार और उनके बेटे अजयपाल सिंह एक बार विधायक रहे। स्वामी प्रसाद मौर्य दो बार बसपा से, तो सपा के डॉ. मनोज कुमार पांडेय 2012 और 2017 में किला फतह कर चुके हैं। पांडेय के खिलाफ स्वामी के बेटे उत्कर्ष एक बार बसपा तो एक बार भाजपा से लड़े, लेकिन जीत नहीं दिला पाए। स्वामी के सपा में जाने के बाद इस सीट पर भाजपा ने पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील के रहने वाले अमरपाल मौर्य को उतार कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वह पिछड़ों की हिमायती है। वहीं, मनोज पांडेय सपा के परंपरागत वोटर यादव, मुस्लिम के साथ ब्राह्मण व अन्य वर्गों को जोड़कर और विकास के काम गिनाकर तीसरी बार विधायक बनने का सपना संजोए हैं।

बाहरी के जवाब में अमरपाल यह कहकर चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में हैं कि अब सब कुछ हमारा इसी क्षेत्र में है। कांग्रेस के पूर्व विधायक अजयपाल सिंह इस बार चुनाव नहीं लड़े तो पार्टी ने भाजपा से आए अतुल सिंह को टिकट दे दिया। भाजपा से टिकट न मिलने पर अतुल ने पाला बदल लिया था। वे पहली बार सियासी मैदान में उतरे हैं। वहीं, बसपा ने अंजलि मौर्य के रूप में नया चेहरा उतारा है। वे पिछड़ों के भरोसे खुद को मजबूत मान रही हैं।

यहां चौथे चरण में 23 फरवरी को मतदान होना है। मतदान का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, चुनाव भाजपा और सपा के बीच सिमटता जा रहा है। परंपरागत वोट और जातीय समीकरण में उलझी इस सीट के जातीय समीकरणों को जो सुलझा लेगा, वही यहां का शहंशाह बनेगा।

सरेनी और सलोन पर भी पड़ता है यहां की हवा का असर

ऊंचाहार सीट से विधानसभा सरेनी और सलोन (सुरक्षित) की सीमाएं जुड़ी हैं। ऊंचाहार में बनने वाले समीकरणों का असर दोनों सीटों पर पड़ता है। पासी बहुल यह क्षेत्र बगल की सलोन सुरक्षित सीट पर ज्यादा असर डालती है, जबकि सरेनी में अगड़ी जाति के लोगों पर असर पड़ता है। ऊंचाहार में जिस जाति का उम्मीदवार जिताऊ होता है, वह पड़ोस की सीट पर उतना ही असर डालता है।

वोटों का गणित
ब्राह्मण    37 हजार
क्षत्रिय    36 हजार
मौर्य    26 हजार
यादव    40 हजार
पासी    64 हजार
वैश्य     25 हजार
मुस्लिम    20 हजार

2017 का  चुनाव परिणाम
डॉ. मनोज कुमार पांडेय,             सपा 59,103
उत्कर्ष मौर्य,                      भाजपा 57,169
विवेक विक्रम सिंह,               बसपा 45,356
अजयपाल सिंह,                कांग्रेस 34,274
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