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बिथरी चैनपुर : मतदाता-प्रत्याशी दोनों बेचैन, मतदाताओं की अगर-मगर लेगी सबका इम्तिहान

Mon, 07 Feb 2022 08:02 AM IST
ishwar ashish राहुल दुबे, अमर उजाला, बरेली

सार

भाजपा यहां ब्राह्मण चेहरे के साथ मैदान में है तो सपा और बसपा ने पिछड़े वर्ग के चेहरों पर दांव खेला है। कांग्रेस क्षत्रिय चेहरे के साथ मैदान में है। बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण इलाके में आता है।
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भाजपाः राघवेंद्र शर्मा, सपाः अगम मौर्या, कांग्रेसः अलका सिंह, बसपाः आशीष पटेल। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र आंवला संसदीय क्षेत्र में आता है। इस विधानसभा क्षेत्र में कुछ नगरीय इलाकों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल हैं। 2017 का विधानसभा चुनाव सपा-कांग्रेस ने गठबंधन में लड़ा था, तो यहां कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं था। इस बार कांग्रेस का प्रत्याशी भी मैदान में है। फिलहाल यहां त्रिकोणीय मुकाबला दिखाई दे रहा है। भाजपा ने इस बार यहां से मौजूदा विधायक राजेश मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल का टिकट काट दिया है। अबकी बार पार्टी ने डॉ. राघवेंद्र शर्मा को मैदान में उतारा है और बसपा से आशीष पटेल पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। सपा ने अगम मौर्या को टिकट दिया है। वहीं, कांग्रेस से इस बार अल्का सिंह मैदान में हैं। वह भाजपा से बागी होकर आई हैं। भाजपा यहां ब्राह्मण चेहरे के साथ मैदान में है तो सपा और बसपा ने पिछड़े वर्ग के चेहरों पर दांव खेला है। कांग्रेस क्षत्रिय चेहरे के साथ मैदान में है। बिथरी चैनपुर विधानसभा क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण इलाके में आता है।

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समस्याओं पर मुखर हैं मतदाता :  मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हम सबसे पहले बेहटी गांव पहुंचे। चुनावी सवाल छिड़ते ही गांव की ओमवती और राजकुमारी तपाक से कहती हैं कि हम तो भाजपा को जिताएंगे। पर, ऊंचा गांव पहुंचते ही अलग बोल सुनाई देते हैं। खेत से पशुओं के लिए चारा काटकर ला रहे ओमकरन और रोहित कहते हैं, हम तो बसपा को जिताएंगे। वहीं, इटौआ में तालाब किनारे बैठे मिले युवाओं में शामिल दुर्गपाल, मुकेश कुमार कहते हैं, इस बार सपा की हवा ज्यादा चल रही है। लोग छुट्टा जानवरों से परेशान हैं। फत्तेपुर ठाकुरान में उपले लगाती मिलीं राजो कहती हैं, घर में रोज शाम को आपस में बात होती है। जहां परिवार के सब लोग कहेंगे, वहीं वोट देंगे। आगे चौराहे पर मिले शिशुपाल, प्रेमपाल कहते हैं, पांच साल तो छुट्टा जानवरों से फसल की रखवाली करने में बीत गए। इस बार सपा, बसपा को फायदा हो सकता है। बाकी इस बार तो कांग्रेस भी मैदान में हैं। यहां सवर्ण मतदाता सबसे अधिक हैं। इसके बाद मुस्लिम मतदाता हैं। अनुसूचित जातियां और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की तादाद
अच्छी खासी है। पिछड़ा वर्ग व सवर्ण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

बदलता रहा सियासी मिजाज : बिथरी चैनपुर सीट की पहचान 2008 तक सन्हा के नाम से होती थी। सन्हा सीट की बात करें तो 1985 तक कांग्रेस ही जीतती रही। 1989 में जनता दल केे कुंवर सर्वराज सिंह नेे पहली बार कांग्रेस का विजय रथ रोका। इसके बाद तो यहां का सियासी मिजाज ही बदल गया। 1993 में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ तो पहली बार यहां सपा जीती। 1996 में पहली बार भाजपा के कब्जे
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में यह सीट आई और सुमनलता सिंह जिले की पहली महिला विधायक बनीं। 2002 में बसपा, 2007 में सपा, 2012 के चुनाव में बसपा और 2017 में भाजपा ने दूसरी बार जीत हासिल की।

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2017 चुनाव का परिणाम

राजेश मिश्रा, भाजपा     96,397
वीरपाल सिंह यादव, सपा     76,886
वीरेंद्र सिंह, बसपा     53,286
मो. शरीफ, रालोद     1102

वोटों का गणित
कुल मतदाता -- 3,92,107
मुस्लिम    60 हजार
एससी    60 हजार
क्षत्रिय     55 हजार
ब्राह्मण     40 हजार
वैश्य    35 हजार
यादव     35 हजार
कुर्मी    20 हजार
अन्य     60 हजार (अनुमानित आंकड़े लगभग में)
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