उधर, जल निगम की सहायक अभियंता एसोसिएशन के महासचिव वरुण विक्रम सिंह ने कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को मनमाना निर्णय बताया है। कहा, इसके खिलाफ अदालत जाएंगे। एसोसिएशन के सदस्य बुधवार को मुख्यमंत्री, जल निगम एमडी और चेयरमैन को ज्ञापन सौपेंगे।
एसआईटी ने 2018 में दर्ज किया था मुकदमा
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जल निगम भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने अप्रैल 2018 में मुकदमा दर्ज किया था। इसमें 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें तत्कालीन विभागीय मंत्री आजम खां भी शामिल हैं। इनके अतिरिक्त तत्कालीन नगर विकास सचिव एसपी सिंह, जल निगम के पूर्व एमडी पीके आसुदानी व जल निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता अनिल खरे को नामजद किए गए थे।
एसआईटी ने भर्ती परीक्षा आयोजित कराने वाली मेसर्स एपटेक लि. के अज्ञात अधिकारियों को अभियुक्त बनाया था। एफआईआर शासन के निर्देश पर की गई थी। बाद में एसआईटी के जांच के आधार पर सभी भर्तियों को निरस्त करने का फैसला किया गया।
जल निगम के जिन अधिकारियों व कर्मचारियों की सेवा समाप्त की गई है, उनसे कोई वसूली नहीं की जाएगी। प्रबंध निदेशक का कहना है कि जिनकी सेवा समाप्त की गई, उन्हें काम करने के अंतिम दिन के वेतन का भी भुगतान किया जाएगा। पर, यह तय किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया पर हुए खर्च की वसूली की जाएगी।
यह वसूली भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों से की जाएगी। इसके लिए जिम्मेदारी तय की जा रही है। जल्द कानूनी कार्यवाही की जाएगी।