पोषाहार वितरण से लेकर कर्मियों के तबादले से लेकर प्रमोशन तक में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा होने पर शासन स्तर से जांच समितियां गठित होती रही हैं। किसी मामले में जांच पूरी करने के लिए एक सप्ताह तो किसी में 15 दिन की समय सीमा दी गई थी। लेकिन सभी जांच समितियों का गठन हुए छह महीने से एक साल से अधिक का समय बीत गया पर एक भी जांच रिपोर्ट न तो सरकार को भेजी गई और न ही एक भी मामले में कार्रवाई हुई।