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स्मारक घोटाला : दो तत्कालीन मंत्रियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, 57 लोगों के खिलाफ चार्जशीट

Tue, 07 Sep 2021 01:24 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को विशेष एमपी एमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है।
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बाबु सिंह कुशवाहा
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विस्तार
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बसपा के शासनकाल में लखनऊ व नोएडा में बने स्मारक व पार्कों के निर्माण में लगभग 1400 करोड़ रुपये के घोटाला मामले में जांच के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने सोमवार को एमपीएमएलए कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसमें दो तत्कालीन मंत्री, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के 23 तत्कालीन अधिकारियों और 34 अन्य लोग आरोपी बनाए गए हैं। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने इस पर सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है। 

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सतर्कता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को विशेष एमपी एमएलए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें यूपीआरएनएन के कई इंजीनियर और ठेकेदार शामिल हैं।  इस मामले पहले भी 18 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जिसमें पूर्व आईएएस तत्कालीन निदेशक खनिज राम बोध मौर्य, राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन एमडी सीपी सिंह, संयुक्त निदेशक खनिज सुहेल अहमद फारुखी, यूपीआरएनएन के तत्कालीन जीएम, प्रोजेक्ट मैनेजर और कई इंजीनियर शामिल हैं।

अब तक 75 के खिलाफ दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
सतर्कता अधिष्ठान के अधिकारियों ने बताया कि अब तक कुल 75 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसमें 37 सरकारी अधिकारी व कर्मचारी हैं और 38 प्राइवेट लोग हैं जिसमें पटटाधारक और ठेकेदार शामिल हैं।
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पूर्व मंत्रियों और शासन के अधिकारियों की चल रही है जांच
इसी मामले में दो तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी व शासन के अधिकारियों के खिलाफ जांच अभी चल रही है। बाबू सिंह कुशवाहा बसपा सरकार में भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के मंत्री थे जबकि नसीमुद्दीन सिद्दीकी लोक निर्माण विभाग के मंत्री थे। हाल ही में इन दोनों लोगों से विजिलेंस ने पूछताछ की है। इसके अलावा शासन के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पूर्व वीसी एलडीएस समेत 6 की अभियोजन स्वीकृत का इंतजार
वहीं पूर्व वीसी एलडीए समेत 6 लोगों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का इंतजार विजिलेंस कर रहा है। अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद इन लोगों के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किए जाएंगे।

लोकायुक्त जांच में हुआ था घोटाले का खुलासा
जानकारी के अनुसार लखनऊ और नोएडा में स्मारकों के निर्माण में 1410 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। इस मामले की शुरुआती जांच लोकायुक्त जस्टिस एनके मल्होत्रा ने की थी। लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट 20 मई 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मुख्य सचिव को भेजी थी। लोकायुक्त ने दोषी पाए गए 199 लोगों के खिलाफ विस्तृत जांच कराने की संस्तुति की थी।

लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद सरकार ने शुरुआती जांच ईओडब्ल्यू से कराई गई और फिर मामले को सतर्कता अधिष्ठान के हवाले कर दिया गया। लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में पत्थरों की बाजार दर से 34 फीसदी ज्यादा दर पर खरीद करने से सरकार को हुई 14.10 अरब रुपये क्षति की भरपाई के लिए क्रिमिनल लॉ एमेडमेंट ऑर्डिनेंस 1944 की धारा 3 के तहत न्यायालय से अनुमति लेकर आरोपियों की संपत्ति कुर्क करके वसूली की सिफारिश की थी।

गौरतलब है कि शासन के आदेश पर गोमतीनगर में एक जनवरी 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराकर लखनऊ व नोएडा में बने स्मारकों के निर्माण में भ्रष्टाचार व अनियमितताओं की जांच की गई। इस मामले में तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी समेत 18 लोगों के खिलाफ विवेचना की गई।

इसमें पता चला कि आरोपियों ने नियम विरुद्ध कंसोर्टियम प्रमुख बनाकर खनन कराया और धन प्राप्त किया। इसमें आरोपियों ने राजस्थान की फर्मों और ठेकेदारों से मिलीभगत करके 13 करोड़ 75 लाख 84 हजार 673 रुपये का बंदरबांट किया। इसी मामले में लोकायुक्त ने भी अपनी जांच में 199 लोगों को दोषी करार देते हुए 20 मई 2013 को शासन को रिपोर्ट भेजी थी। इस मामले में अब तक 23 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।

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