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यूपी चुनाव 2022 : लखनऊ में दूसरे दौर की बैठक में संघ ने मंत्रियों के पेंच कसे, वैचारिक संगठनों के समन्वय से काम करें

Mon, 16 Aug 2021 10:10 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

शाम को मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन के साथ आयोजित समन्वय बैठक में संघ के पूर्वी क्षेत्र क्षेत्रीय प्रचारक अनिल कुमार, पश्चिमी क्षेत्र के प्रचारक महेश कुमार की मौजूदगी में कृष्णगोपाल ने शिक्षा, आर्थिक और सुरक्षा के मुद्दे पर हुई बैठक में सामने आए निष्कर्ष को सरकार व संगठन के सामने रखा।
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश सरकार के मंत्रियों को संघ के विविध क्षेत्र के वैचारिक संगठनों से समन्वय स्थापित कर उनके फीडबैक के आधार पर काम करने की नसीहत दी है। संघ का मानना है कि फील्ड में काम करने वाले वैचारिक संगठनों के पास धरातल का फीडबैक रहता है, यदि उसके अनुसार काम किया जाए तो समस्याओं का समाधान भी होगा और जनता में संदेश भी अच्छा जाएगा। संघ ने संगठनों से मिली सूचनाओं के आधार पर मंत्रियों के पेंच कसते हुए साफ किया कि चुनाव में मात्र छह महीने का समय बचा है, जो भी अधूरे काम है उन्हें पूरे करें और जो समस्याएं सामने आ रही है उनके समाधान का रास्ता निकालें।

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह कृष्णगोपाल, अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख सुनील आंबेकर और अखिल भारतीय सह-व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने चार चरण में प्रदेश सरकार के मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, महामंत्री संगठन सुनील बंसल और विचार परिवार के संगठनों के पदाधिकारियों के साथ मंथन किया। गुडंबा स्थित एक होटल में आयोजित समन्वय बैठक के पहले चरण में सुबह शिक्षा एवं वैचारिक संगठन की बैठक उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी और प्राविधिक शिक्षा मंत्री कपिल देव अग्रवाल की मौजूदगी में हुई।

बैठक में विद्या भारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, शैक्षिक महासंघ, इतिहास संकलन समिति, संस्कृति भारती और विज्ञान भारती के पदाधिकारी मौजूद थे। वहीं आर्थिक प्रबंधन की बैठक में कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, जलशक्ति मंत्री ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, सहकार भारती, किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी मौजूद थे। सुरक्षा व सामाजिक समन्वय बैठक में सीमा जागरण मंच, पूर्व सैनिक सेवा परिषद और राष्ट्रीय सेविका समिति के पदाधिकारी, विधि मंत्री ब्रजेश पाठक, समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री मौजूद थे। बैठक में कृष्णगोपाल ने कहा कि सरकार के मंत्रियों को फील्ड में काम करने वाले वैचारिक संगठनों से संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठनों के पदाधिकारी भी समस्याओं से मंत्रियो को अवगत क राकर उनके समाधान का रास्ता निकालें। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच संवादहीनता नहीं होनी चाहिए।
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संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में वैचारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी सरकार के मंत्रियों को आइना दिखाया। इतिहास संकलन समिति के पदाधिकारी ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विभाग की छवि को सुधारने की आवश्यकता जताई। वहीं किसान संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसानों के लिए सरकार ने बहुत काम किए हैं लेकिन किसानों के बीच उनका संदेश पहुंचाने और किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने की आवश्यकता है। गन्ना किसानों के बीच भी उनके लिए किए गए कार्यों को बताने की आवश्यकता है।

शाम को मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री संगठन के साथ आयोजित समन्वय बैठक में संघ के पूर्वी क्षेत्र क्षेत्रीय प्रचारक अनिल कुमार, पश्चिमी क्षेत्र के प्रचारक महेश कुमार की मौजूदगी में कृष्णगोपाल ने शिक्षा, आर्थिक और सुरक्षा के मुद्दे पर हुई बैठक में सामने आए निष्कर्ष को सरकार व संगठन के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने शिक्षा, कृषि, सुरक्षा और वनवासी कल्याण के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी। साथ ही कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर किए जा रहे उपायों को बताया। उन्होंने मिशन शक्ति को नीचे तक लेकर जाने की आवश्यकता जताई साथ ही विचार परिवार के संगठनों के जरिये सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता के बीच लेकर जाने के साथ लाभार्थी संपर्क भी तेज करने का सुझाव दिया।

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बीएल संतोष से मिलने वाले मंत्री ही बुलाए गए

जानकारी के मुताबिक संघ ने सोमवार की समन्वय बैठक में उन्हीं मंत्रियों को बुलाया था जिन्होंने जून में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के लखनऊ प्रवास के दौरान उनसे मुलाकात कर विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी थी।

वैचारिक संगठनों को सौंपा जाएगा एजेंडा
संघ जल्द ही विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वैचारिक संगठनों उनके क्षेत्र से जुड़ा एजेंडा सौंपेगा। विभिन्न संगठनों को उनसे जुड़े लोगों के बीच जाकर मोदी-योगी सरकार की उपलब्धियां बताते हुए सरकार की छवि सुधारने, विपक्ष के आरोपों को निराधार साबित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

ये आए सुझाव
- वित्तविहीन विद्यालयों ने कोरोना काल में फीस तो पूरी ली है, लेकिन शिक्षकों को वेतन नहीं दिया है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि वित्तविहीन शिक्षकों को भी नियमित मिल सके।
- सपा सरकार में ऊर्दू को महत्व दिया गया था। भाजपा सरकार में संस्कृत को महत्व देने पर काम होना चाहिए। संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती होनी चाहिए।
- संस्कृत महाविद्यालयों के शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर होनी चाहिए। संस्कृत शिक्षकों की भर्ती होनी चाहिए।

तीसरी लहर पर भी संघ करेगा अलर्ट
आरएसएस कोरोना की संभावित तीसरी लहर पर भी विविध क्षेत्र के संगठनों को अलर्ट करेगा। जानकारी के मुताबिक पूर्वी क्षेत्र के सभी प्रांतों के विविध संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक होगी। बैठक में तीसरी लहर से मुकाबले की रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
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