अंबेडकर स्मारक समिति के कर्मचारियों के पीएफ के रुपये हड़पने के लिए एक बाइक चोर को खाता संचालित करने का अधिकार दे दिया गया। वहीं उसके सहयोग में छह करोड़ के घोटाले में कर्नाटक सीबीआई कोर्ट से सात साल की सजा पा चुके आरोपी को लगाया गया। गिरोह को स्मारक समिति का लेखाकर संजय सिंह संचालित कर रहा था। इनके अलावा एक एलडीए का दलाल, एक ठेकेदार और दो अन्य युवकों ने मिलकर रकम हड़पने की साजिश रची थी। इस साजिश का खुलासा संजय सिंह के मोबाइल व ई-मेल से हुआ। पुलिस ने एक-एक कर सभी आरोपियों को दबोचना शुरू किया।
प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर केशव कुमार तिवारी के मुताबिक इन जालसाजों ने स्मारक समिति के कर्मचारियों के पीएफ के 48 करोड़ की एफडी को हड़पने की साजिश रच डाली थी। इसकी शुरूआत 31 मार्च 2021 को हुई। इसी दिन स्मारक समिति के बचत खाते पीएनबी हजरतगंज से यह रकम निकालकर बैंक ऑफ बड़ौदा के रोशनाबाद खाते में जमा किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे सारी रकम एक कंपनी केखाते में ट्रांसफर करने लगे। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि इस रकम को जमा करने के लिए स्मारक समिति ने सभी बैंकों को पत्र भेजा, जिसके बाद बैंकों ने अपनी ब्याज दर के बारे में समिति के पत्र लिखकर जानकारी दी। बैंक ऑफ बड़ौदा ने सबसे अधिक ब्याज दर देने की बात कही। इस पर समिति के अधिकारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा में खाता खोलने की सहमति दे दी। 31 मार्च को हजरतगंज की पीएनबी शाखा से रकम निकालकर बैंक ऑफ बड़ौदा में ट्रांसफर कराई गई। करीब पांच दिनों तक इसके कोई कागजी कार्रवाई नहीं की गई। इस पर बैंक प्रबंधक नागेंद्र पाल पांच अप्रैल को स्मारक समिति पहुंचे।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर खाता खोलने की दी गई अनुमति
पुलिस के मुताबिक बैंक में खाता खोलने के लिए प्रबंध समिति से अनुमति मांगी गई। जिस पर उच्चाधिकारियों ने सिर्फ यह दिशा निर्देश दिया कि नियमानुसार कार्रवाई करें। इस निर्देश को ही लेखाकार ने आदेश बताकर खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पांच अप्रैल को स्मारक समिति में बैंक प्रबंधक की मुलाकात संजय सिंह के साथ शैलेंद्र उर्फ शैलू, रविकांत उर्फ मुकेश पांडेय, संदीप पी, कृष्ण मोहन श्रीवास्तव, दीपक यादवा और आकाश कार्तिकेय से हुई। संजय ने कृष्णमोहन व संदीप पी को समिति का सहायक लेखाकार बताया। एक पत्र बनाया गया, जिसमें कृष्ण मोहन उर्फ निक्कू श्रीवास्तव को खाता संचालन का अधिकार दिया गया। इस पत्र पर एलडीए सचिव पवन गंगवार व वित्त प्रबंधक देवेंद्र मणि उपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर थे। खाता खोलने के लिए एक फर्जी ई-मेल आईडी स्मारक समिति के नाम से तैयार की गई। वहीं कृष्णमोहन श्रीवास्तव का निजी मोबाइल नंबर दिया गया। सारे दस्तावेज लेकर बैंक मैनेजर शाखा पहुंचा। उसने सारे पेपर डाउनलोड कर खाता खोल दिया।
बैंक मैनेजर ने डाल दिया संजय का मोबाइल नंबर
बैंक खाते को सक्रिय करने के लिए मोबाइल नंबर की जरूरत थी। कृष्णमोहन का जो मोबाइल नंबर दिया गया था, वह सक्रिय नहीं था। इस पर खाता खोलने के लिए बैंक प्रबंधक ने स्मारक समिति के लेखाकार संजय सिंह का मोबाइल नंबर डाल दिया। सारे मेसेज संजय सिंह के मोबाइल पर जाने लगे। 6 अप्रैल को 2 करोड़ की एफडी बनाई गई, जिसका मेसेज संजय के मोबाइल पर गया। इस मामले में संजय ने बैंक से तय किया था कि 2-2 करोड़ की 24 एफडी बनाई जानी है। जो एक महीने में ही 24 कार्य दिवस में पूरा करना है। 6 अप्रैल के बाद दूसरी एफडी 8 अप्रैल को बनी, जिसका मेसेज भी संजय के पास ही गया।
चेक बुक व मूल रसीद लेने बैंक पहुंचा संदीप
पड़ताल में सामने आया कि 8 अप्रैल को दूसरी एफडी बनने के कुछ देर बाद बैंक में संदीप पी पहुंचा। उसने प्रबंधक से एक चेकबुक और दोनों एफडी की मूल रसीद जारी करने की बातचीत की। बैंक मैनेजर ने इसके लिए संजय सिंह से बातचीत कर कंफर्मेशन लिया। इसके बाद एक चेक बुक और दो एफडी की रसीद संदीप पी को दी। इसके लिए संदीप के पैन कार्ड की फोटो कॉपी ले ली थी। इसी दिन दो बजे के करीब दोबारा संदीप बैंक पहुंचा। उसने इस बार हस्ताक्षर किए गए चेक और आरटीजीएस करने के लिए पत्र बैंक मैनेजर को दिया। इस चेक व आरटीजीएस करने के लिए भी मैनेजर ने संजय सिंह से कंफर्मेशन लिया।
दस दिन में खाते से ट्रांसफर किए 38 करोड़
जालसाजों ने पूछताछ में कुबूल किया कि आरटीजीएस करने के कंफर्मेशन के बाद पहली बार 5.26 करोड़ रुपये राइट पे सर्विसेज कंपनी प्रा. लि. नोएडा केखाते में ट्रांसफर किया गया। इसका भी मेसेज संजय सिंह के पास गया। एक-एक कर 10 दिन के अंदर जालसाजों ने कई पत्र व चेक के जरिए 38 करोड़ रुपये की रकम राइट पे कंपनी केखाते में ट्रांसफर कर दिए थे। 17 अप्रैल को अंतिम बार रकम राइट पे कंपनी के खातें में ट्रांसफर हुई थी।
अरे यह क्या... नंबर नहीं बदला?
स्मारक समिति के खाते से लगातार हो रहे ट्रांजैक्शन का मेसेज लेखाकार संजय सिंह के मोबाइल पर जाने लगा। इस पर संजय ने 8 अप्रैल को बैंक मैनेजर से व्हाट्सएप पर चैटिंग शुरू की। जिसमें संजय ने पहला शब्द लिखा... अरे यह क्या? अभी तक मोबाइल नंबर नहीं बदला क्या? बैंक मैनेजर ने जवाब दिया कि कल बदल जाएगा। इस मेसेज के बाद नौ अप्रैल को बैंक मैनेजर ने खाते से संजय का मोबाइल नंबर हटाकर कृष्णमोहन के मोबाइल नंबर को संबद्ध कर दिया। इसके बाद सारे मेसेज कृष्ण मोहन के मोबाइल पर आने लगे।
पांच एफडी की रसीद संदीप ने ली
पुलिस के मुताबिक स्मारक समिति के कार्यालय में 5 से 17 अप्रैल के बीच में 2-2 करोड़ की पांच एफडी तैयार की गई। जो बैंक से संदीप पी हासिल करने गया। उसने इन सभी एफडी को स्मारक समिति के लेखाकार संजय सिंह को दिया, जो स्मारक समिति के रिकार्ड में मौजूद हैं। लेकिन 17 अप्रैल को जब खाते में रकम नहीं रही तो बैंक मैनेजर ने संजय से बातचीत की। कहा कि एक महीने में 24 एफडी बनानी है, रकम नहीं है तो कैसे बनेगी। इस पर संजय ने और समय दिलाने के साथ रकम के इंतजाम करने की बात कही। बैंक मैनेजर उसपर भरोसा कर लिया। बैंक मैनेजर ने जब रकम न होने की बात कही तो संजय को इस बात का डर सताने लगा कि एफडी नहीं बनी तो इस खेल का खुलासा हो जाएगा। इस पर संदीप व कृष्ण मोहन से संपर्क कर राइट पे कंपनी के खाते से रकम वापस बैंक ऑफ बड़ौदा में डालने को कहा। इस पर धीरे-धीरे कर कभी दो करोड़ तो कभी चार करोड़ रुपये खाते में वापस आए। जब जालसाजों ने 28 करोड़ रुपये वापस कर दिए फिर रकम डालनी बंद कर दी। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि स्मारक समिति में कुल 19 एफडी मिले। पांच शुरूआत के और 14 बाद में बने हुए।
सीबीआई कोर्ट से सजायाफ्ता करता था मेल का संचालन
स्मारक समिति के नाम से बने फर्जी मेल आईडी का संचालन सीबीआई कोर्ट से 6 करोड़ के घोटाले में सजा पा चुका संदीप पी करता था। संदीप को 2003 में एक एनआरआई का 6 करोड़ हड़पने का आरोप था। जिसमें सीबीआई कोर्ट ने 2015 में उसे सात साल की सजा सुनाई थी। वह अपील पर रिहा हुआ था। इसके बाद स्मारक समिति के खाते में सेंध लगाने लगा। संदीप ने ही बैंक मैनेजर के हर सवाल का जवाब ईमेल के जरिए देता रहा। वहीं 2006 में गोंडा के नगर कोतवाली से बाइक चोरी में जेल जा चुका कृष्णमोहन श्रीवास्तव स्मारक समिति के बैंक का खाता संचालित करता था।