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ठीक हो चुके संक्रमितों में कम मिल रहीं एंटीबॉडीज, नहीं डोनेट कर पा रहे प्लाज्मा

Tue, 25 Aug 2020 07:59 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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केजीएमयू
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केस-1
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केजीएमयू के मनोरोग चिकित्सा विभाग के कर्मचारी पॉजिटिव आने के बाद 12 दिन अस्पताल में भर्ती रहे। फिर 14 दिन होम क्वारंटीन रहे। सोमवार को प्लाज्मा डोनेट करने पहुंचे तो एंटीबॉडी कम निकलने से प्लाज्मा डोनेट नहीं कर पाए। 

केस-2
मेडिसिन विभाग के कर्मचारी होल्डिंग एरिया में काम करते समय संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती रहे। शनिवार को प्लाज्मा दान करने पहुंचे तो पर्याप्त एंटीबॉडी न मिलने से उन्हें लौटा दिया गया।     
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कोरोना से जंग जीत चुके 35 प्रतिशत मरीजों में पर्याप्त एंटीबॉडीज नहीं मिल रही हैं। यह खुलासा केजीएमयू सहित विभिन्न ब्लड बैंकों में प्लाज्मा डोनेशन के लिए पहुंचने वालों से हुआ। ऐसे में इनके पॉजिटिव होने पर संशय बना है। वहीं, एंटीबॉडी की कमी ने चिकित्सा विशेषज्ञों में मंथन का नया दौर शुरू कर दिया है।

56 लोगं दान कर चुके प्लाज्मा

केजीएमयू में बनाए गए प्लाज्मा बैंक में अब तक 56 लोग प्लाज्मा दान कर चुके हैं। इसी तरह पीजीआई में 12 और लोहिया संस्थान में 10 प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं।

केजीएमयू के ब्लड बैंक में प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आने वाले 35 फीसदी लोगों को लौटा दिया गया, क्योंकि उनमें पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं मिली। शनिवार को ब्लड बैंक में लगे कैंप में प्लाज्मा देने के लिए आए 12 केजीएमयू के कर्मचारियों में से सात को रिजेक्ट कर दिया गया।

सोमवार को लगे शिविर में आए 10 कर्मचारियों में सात की जांच की गई। इनमें से सिर्फ चार में एंटीबॉडी मिली। खास बात यह है कि इन कर्मचारियों का आरटीपीसीआर टेस्ट भी हुआ था।

पॉजिटिव होने के बाद ये अस्पताल में भर्ती हुए और 14 दिन होम क्वारंटीन भी रहे। इसके बाद प्लाज्मा डोनेशन को पहुंचे थे। लोहिया संस्थान, पीजीआई में डोनेशन करने पहुंचने वालों में कई रिजेक्ट हुए।
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एंटीबॉडी पर नई बहस शुरू

अभी तक कहा जा रहा था कोरोना की चपेट में आने के बाद एंटीबॉडी बन जाती है। ठीक होने के बाद वह प्लाज्मा डोनेट कर सकता है, लेकिन पर्याप्त एंटीबॉडी नहीं पाए जाने से चिकित्सा विशेषज्ञों में नई बहस शुरू हो गई है। इसके लिए फॉल्स रिपोर्टिंग होना भी कारण बता रहे हैं।  

इस मुद्दे पर विस्तृत शोध की जरूरत है। माना जा रहा था कि कुछ लोगों ने एंटीजन या अन्य टेस्ट कराए होंगे, जिसमें उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई होगी, लेकिन केजीएमयू के कर्मचारियों में एंटीबॉडी कम पाए जाने के बाद नए सिरे से शोध की जरूरत महसूस हो रही है। - डॉ. तूलिका चंद्रा, विभागाध्यक्ष ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, केजीएमयू 

प्लाज्मा डोनेट करने आने वालों की काउंसलिंग में  पता चला कि कुछ लोगों को फीवर नहीं आया था। इनमें एंटीबॉडी पर्याप्त नहीं पाई गई। प्लाज्मा डोनेशन की गाइडलाइन में एंटीबॉडी टेस्ट जरूरी है। ऐसे में जिनमें यह कम पाई जा रही है, उनका प्लाज्मा नहीं लिया जा रहा है। -डॉ. अनुपम वर्मा, प्लाज्मा बैंक प्रभारी, पीजीआई 

यह बात सही है कि तमाम लोगों में एंटीबॉडी का स्तर 1.4 से कम मिला है। यह भी किया जा सकता है कि कुछ दिन बाद दोबारा ऐसे लोगों की जांच की जाए और देखा जाए कि एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा या नहीं। - डॉ. शीतल वर्मा, एसो. प्रो. माइक्रोबायोलॉजी विभाग, केजीेएमयू
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