10 साल बाद धार्मिक जनगणना के आंकड़ों से निकली तस्वीर सामने आई है। इन आंकड़ों में यूपी की तस्वीर थोड़ी चौंकाने वाली कही जा सकती है। प्रदेश में हिंदुओं, सिखों, बौद्धों और जैनियों की आबादी विस्तार की रफ्तार पिछले 10 साल में घटी है तो मुस्लिमों व ईसाइयों की बढ़ी है।
सूबे में 79.73 प्रतिशत हिंदू, 19.26 फीसदी मुसलमान, 0.17 प्रतिशत ईसाई और 0.32 फीसदी सिख हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जारी धार्मिक जनसंख्या के आंकड़ों के हिसाब से पिछले दस साल में हिंदुओं की आबादी में बढ़ोतरी की रफ्तार 0.88 प्रतिशत घटी है।
2001 की जनगणना में प्रदेश की कुल आबादी के 80.61 फीसदी हिंदू थे। 2011 की जनगणना के हिसाब से जारी ताजा आंकड़ों में इनकी संख्या 79.73 फीसदी रह गई है। मुस्लिमों की आबादी 0.77 प्रतिशत बढ़ी है।
पिछली जनगणना में मुस्लिमों की तादाद 18.49 प्रतिशत थी जो नए आंकड़ों में बढ़कर 19.26 फीसदी हो गई है। इसी तरह ईसाइयों की आबादी भी बढ़ी है।
दस साल पहले जहां ईसाइयों की कुल आबादी कुल जनसंख्या का 0.12 फीसदी थी वह .05 फीसदी बढ़कर अब 0.17 प्रतिशत हो गई है।
मुस्लिम के अलावा यह अकेला दूसरा धर्म है जिसकी आबादी बढ़ी है। इनके अलावा पिछले दस साल में सिखों व बौद्धों की आबादी .08-08 प्रतिशत तथा जैनियों की आबादी में .25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
आजादी के बाद 1951 में हुई पहली जनगणना के मुताबिक देश की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 9.8 फीसदी जबकि हिंदुओं की हिस्सेदारी 84.1 फीसदी थी। इन 60 सालों में कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है वहीं हिंदुओं की घटी है।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 1951 के मुकाबले करीब 4.5 फीसदी बढ़कर 14.2 फीसदी हो गई है। वर्ष 2001 में यह आंकड़ा 13.8 फीसदी था। इन 60 सालों में हिंदुओं की हिस्सेदारी 4.3 फीसदी घटी है।