किडनी ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भी अब किडनी ट्रांसप्लांट होगा।
शासन से हरी झंडी मिलते ही संस्थान ने इसके लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। राजधानी में ये तीसरा चिकित्सा संस्थान होगा जहां किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी। एसजीपीजीआई में दो दशक से भी ज्यादा समय से गुर्दा प्रत्यारोपण किया जा रहा है, जबकि केजीएमयू में दो साल पहले प्रत्यारोपण की शुरुआत हुई थी।
लोहिया इंस्टीट्यूट में इस समय तीन यूरोलॉजिस्ट और एक नेफ्रोलॉजिस्ट हैं। इसके साथ ही 14 बेड की किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट, आईसीयू व मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर भी है। सिर्फ कमी एक नेफ्रोलॉजिस्ट की है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की देखभाल नेफ्रोलॉजी विभाग की जिम्मेदारी होती है।
नेफ्रोलॉजिस्ट मरीज के गुर्दे की कार्य प्रणाली पर नजर रखते हैं। लोहिया इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. दीपक मालवीय के अनुसार दोनों विभागों में फैकल्टी के अलावा रेजीडेंट डॉक्टर भी हैं। इससे मरीजों की 24 घंटे देखरेख हो सकती है। कोशिश की जा रही है कि अगस्त में पहला ट्रांसप्लांट किया जा सके।
इंस्टीट्यूट के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. ईश्वर राम धयाल ने बताया कि तीन मरीज और उन्हें गुर्दा देने वाले परिवार के डोनर तैयार हैं। मरीज और डोनर दोनों की सभी तरह की जांचे भी हो गई हैं। कोशिश की जाएगी कि पहला प्रत्यारोपण जल्दी ही किया जा सके।
सूबे में जितने गुर्दा रोगी प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं उनमें से महज 10 फीसदी को ही चिकित्सा संस्थान मदद कर पा रहे हैं। एसजीपीजीआई की वेबसाइट पर नजर डालें तो गुर्दा प्रत्यारोपरण की वेटिंग में 450 से अधिक नाम दर्ज हैं।