केजीएमयू में होने वाले उच्च गुणवत्ता के शोध अब सिर्फ शोधपत्रों तक ही सीमित नहीं होंगे। मरीजों के इलाज में उन्नत किस्म की दवाओं तथा विभिन्न प्रक्रिया के रूप में भी उनका उपयोग हो सकेगा।
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने (आईसीएमआर) एडवांस क्लीनिकल ट्रायल के लिए केजीएमयू को चयन किया है। पूरे देश में इसके लिए 12 और सेंट्रल जोन में एकमात्र संस्थान के रूप में केजीएमयू का नाम शामिल हुआ है। इस उपलब्धि के बाद केजीएमयू के लिए अच्छे शोध को विभिन्न दवाओं और चिकित्सीय प्रक्रिया के रूप में लागू करना आसान हो जाएगा।
आईसीएमआर ने केजीएमयू का चयन एडवांस क्लीनिकल ट्रॉयल सेंटर के रूप में किया है। इसके बाद अब केजीएमयू में विभिन्न दवाओं और वैक्सीन का मरीजों पर क्लीनिकल ट्रॉयल हो सकेगा। इसके बाद मजबूत डाटा और रिजल्ट के आधार पर एक उत्पाद को उनको बाजार में उतारा जा सकेगा। अभी तक केजीएमयू में छोटे स्तर के ही ट्रायल होते थे। पिछले कुछ समय से हो रहे प्लाज्मा थेरेपी के ट्रायल को दुनिया भर में काफी सराहा गया है। इसी के बाद केजीएमयू के लिए एडवांस क्लीनिकल ट्रायल सेंटर बनने का रास्ता साफ हुआ है।
एक नेटवर्क से जुड़े हैं देश भर के संस्थान
केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु के अनुसार अभी तक देश में क्लीनिकल ट्रॉयल की केंद्रीय व्यवस्था नहीं थी, इसलिए विभिन्न दवा, वैक्सीन या प्रक्रिया का ट्रायल सीमित संख्या में ही हो पाता था। आईसीएमआर ने इंडियन क्लीनिकल ट्रायल एंड एजुकेशन नेटवर्क बनाया है, जिसमें देशभर से संस्थानों को चुनाव किया गया है। इसका मकसद क्लीनिकल ट्रॉयल के दायरे को बढ़ाना है।
पहली श्रेणी में शामिल हुआ केजीएमयू
आईसीएमआर ने इंडियन क्लीनिकल ट्रायल एंड एजुकेशन नेटवर्क के तहत पांच श्रेणी में संस्थानों का चयन किया गया है। इसमें सबसे ऊपर एडवांस सेंटर फॉर क्लीनिकल ट्रायल को रखा गया है। देशभर में इसके लिए 12 केंद्र चुने गए हैं। सेंट्रल जोन में अकेले केजीएमयू को इसका केंद्र बनाया गया है। इसके साथ ही उत्तर क्षेत्र में एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ को, पश्चिमी जोन में एसएमएस जयपुर व महाराष्ट्र के महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट का चयन किया गया है। इसके अलावा छह रीजनल सेंटर, 20 आईसीएमआर सेंटर, छह सुपरस्पेशलिटी सेंटर फॉर क्लीनिकल ट्रायल भी बनाए गए हैं। तीन संस्थाओं को नॉलेज पार्टनर के रूप में भी जोड़ा गया है।