फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विद्वत समाज सम्मेलन: कलराज मिश्र बोले- विकास के लिए छोड़नी होगी जाति व क्षेत्र की संकीर्ण मानसिकता

Mon, 30 Aug 2021 02:43 PM IST
ishwar ashish lucknow, uttar pradesh, india

सार

लखनऊ में आयोजित विद्वत समाज सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह को राजस्थान के राज्यपाल कलराम मिश्र ने संबोधित किया। जिसमें उन्होंने विकास के लिए जातीय संकीर्णताओं को छोड़ने की अपील की।
विज्ञापन
राज्यपाल कलराज मिश्र - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि समाज के विकास के लिए जाति व क्षेत्र की संकीर्ण मानसिकता को पीछे छोड़ना होगा। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का संकल्प भी लेना होगा। प्रबुद्धजन संस्कृति के जीवंत मूल्यों को सहेजते हुए राष्ट्र और समाज के उत्थान में सार्थक भूमिका निभाएं।

विज्ञापन


लखनऊ के चौधरी चरण सिंह सहकारिता सभागार में आयोजित विद्वत समाज सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कलराज मिश्र ने कहा कि संस्कृति व्यक्ति में निरंतर सुधार करते हुए उसे संस्कारवान बनाती है। इससे वह अपने लिए ही नहीं, बल्कि सबके लिए कार्य करने के लिए प्रेरित होता है। मिश्र ने कहा कि वे ब्राह्मण को किसी समाज व समुदाय के सीमित अर्थ में नहीं, बल्कि विराट भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग के रूप में देखते हैं। ब्राह्मण विद्वतजनों से जुड़ा देश का विराट समुदाय है। इस समुदाय ने सदा ही भारतीय संस्कृति की जड़ों को पोषित करते हुए जीवन को सकारात्मक दिशा देने का काम किया है।

सम्मेलन में यूपीसीएलडीएफ  के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का काम आज भी विद्वत समाज कर रहा है। बदलते हुए सामाजिक परिदृश्य, निंदा व सामाजिक कुरीतियों से विद्वत समाज को दूर रहना चाहिए। कार्यक्रम के सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कुमार द्विवेदी व श्रीहनुमान गढ़ी के मुख्य महंत राजूदास महाराज का विद्वत समिति की तरफ  से अतिथियों का स्वागत किया गया।

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

समाज के उत्थान में विद्वतजनों की महती भूमिका : डॉ. महेंद्र

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति और समाज के उत्थान में विद्वतजनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनके कार्य एवं व्यवहार से सनातन जीवन मूल्यों के उच्च आदर्श परिलक्षित होने चाहिए। सनातन संस्कृति की रक्षा और प्रसार का दायित्व हजारों वर्षों से विद्वत समाज के हाथों में है। वहीं केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए भारत को परम वैभव राष्ट्र की ओर ले जाने के लिए कार्य करना चाहिए। हमारी संस्कृति विश्व की धरोहर है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें