युवती से सामूहिक दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मामले में सुबूत न होने के चलते आरोपी भाइयों को कोर्ट ने बरी कर दिया। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने झूठा केस दर्ज कराने के मामले में महिला वादी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार छपिया थाना क्षेत्र की निवासी एक 19 वर्षीय दलित बालिका ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि शादी का झांसा देकर अनिल कुमार वर्मा उससे शारीरिक संबंध बनाता रहा है। शादी के नाम पर वह टालमटोल करता है। 16 जुलाई 2022 को दोपहर दो बजे जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया तो वह नाराज हो गया और अपशब्द कहकर मारने लगा। इसी बीच उसका भाई सुनील कुमार वर्मा आ गया और उसने भी मारा। दोनों ने जान से मारने की धमकी भी दी।
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विवेचना के दौरान अपशब्द कहकर मारपीट, जान से मारने की धमकी, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट व एससी-एसटी एक्ट के अपराध का साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया लेकिन ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष न्यायालय में साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सका तो बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को दोषमुक्त करने की मांग की।
मंगलवार को इस मामले में निर्णय सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राजेश नारायण मणि त्रिपाठी ने आरोपी अभियुक्त अनिल व सुनील को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने आरोपी अभियुक्तों के विरुद्ध झूठी व फर्जी घटना बनाकर केस दर्ज कराने के संबंध में वादिनी युवती के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत प्रकीर्ण दांडिक केस दर्ज करने का आदेश दिया है।