लखनऊ। एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को विभूतिखंड इलाके से एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड व मदर हुड केयर कंपनी बनाकर बेरोजगारों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करती थी। एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह ने 500 बेरोजगारों से करीब छह करोड़ रुपये की ठगी की। इस गिरोह के चार सदस्यों को दबोचा गया है। उनके पास से विधानसभा सचिवालय का प्रवेश पत्र के अलावा कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए जिसमें कई सरकारी विभागों के नियुक्ति पत्र व एग्रीमेंट लेटर शामिल हैं।
कई विभागों में फर्जी भर्ती निकालकर कूटरचित नियुक्ति पत्र, परिचय पत्र के जरिये ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ एक साल पहले इंदिरानगर थाने व विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस गिरोह के आरोपियों की तलाश में एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने अपनी टीम को लगाया। एसटीएफ के एसआई पंकज सिंह व मनोज सिंह की टीम ने जब पड़ताल शुरू की तो चार लोगों के नाम सामने आए। एसटीएफ व इंदिरानगर थाने की पुलिस ने बृहस्पतिवार को विभूतिखंड इलाके से चार लोगों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का डायरेक्टर गोरखपुर के खोराबार स्थित बड़गों निवासी अरुण कुमार दुबे, बस्ती के कलवारी स्थित डारीडीहा निवासी अनिरुद्ध पांडेय, बहराइच के नानपारा स्थित तोपखाना कस्बा निवासी खालिद मुनव्वर बेग और बाराबंकी के देवा टीकापुर निवासी अनुराग मिश्रा शामिल हैं।
ये सामान हुआ बरामद
एसटीएफ टीम ने आरोपियों के पास से 9 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल, आधार व पैन कार्ड, एक विधानसभा सचिवालय प्रवेश पत्र, 22 फाइल, 178 कर्मचारी हस्त पुस्तिका, 34 एग्रीमेंट पेपर, 95 स्टॉम्प पेपर, 60 लेटर हेड मदर हुड केयर कंपनी, 55 लेटर हैड किसान एग्रो जीविका भूमि प्रोडक्ट लि., 39 परिचय पत्र कृषि कुंभ प्रा. लि., 20 रजिस्टर व हिसाब की डायरी, 7 बिल बुक, दो फाइल टैक्स इनवाइस, 60 कर्मचारियों के खाता डिटेल, 11 रजिस्टेशन पेपर, 230 नियुक्ति पत्र, 255 शैक्षिक दस्तावेज की प्रतियां, 5 चेक भरा हुआ, दो चेक बुक, दो कंप्यूटर, दो स्वाइप मशीन, दो चार पहिया वाहन व नकदी आरोपियों के पास से बरामद किया।
वेबसाइट के जरिये ठगते थे
एसटीएफ के मुताबिक, आरोपियों ने बेरोजगारों को ठगने के लिए कई नाम से वेबसाइट बना रखी थी। इसमें कृषि कुंभ डॉट ओआरजी, कृषिकुंभ डॉट इन, जैविक-भारत डॉट ओआरजी शामिल हैं। इन वेबसाइट पर सरकारी विभागों की नौकरियों के विज्ञापन डालते थे। इसके बाद बेरोजगारों को झांसा देकर अपने कार्यालय बुलाकर इंटरव्यू कराते। फिर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर उनको तैनाती की बात कहकर भेज देते।
इंजीनियर है मास्टरमाइंड अरुण दुबे
एटीएफ के मुताबिक इस गिरोह का सरगना व मास्टरमाइंड अरुण कुमार दुबे है। वह कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड का डायरेक्टर भी है। उसने पूछताछ में बताया कि 2005 में मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की। इसके बाद 2015 तक रिलायंस कम्युनिकेशन, टाटा कम्युनिकेशन, जीटीएल कंपनी में नौकरी की। 2015 में जीटीएल कंपनी में मैनेजर के पद पर था। इस दौरान लखनऊ की तैनाती में कंपनी के कार्यालय से 10 लैपटॉप व बैटरियाें की चोरी हुई जिसका मुकदमा अलीगंज थाने में दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दो साल बाद जमानत मिली।
जमानत मिलने के बाद खोली कई कंपनियां
पूछताछ में अरुण ने कुबूल किया कि दो साल बाद 2017 में उसे जमानत मिली। इसके बाद उसने कई कंपनियां खोलीं। इसमें लिगरो इंडिया निधि लि., 2018 में कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड, इसी साल इनकार्गो लि. व मदर हुड केयर एनजीओ में साझीदार बना। 2020 में वैदिक नैचुरल फूड्स प्रा. लि. आदि नाम से कंपनी बनाई। कई वेबसाइट बनाकर लोगों को सरकारी विभागो में नौकरी देने के नाम पर ठगी शुरू की। इस दौरान करीब 500 बेरोजगारों से रुपये ऐंठे। इस काम में अनिरूद्घ पांडेय, खालिद मुनव्वर बेग, अनुराग मिश्रा, कुमार पंकज, देव यादव, शशांक गिरी, देवेश मिश्रा, विनय शर्मा, विनीत मिश्रा सहयोगी रहे। इन सभी की मदद से 6 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
भरोसा कायम करने के लिए आयोजित करता था सेमिनार
आरोपी ने बताया कि लोगों को झांसे में रखने के लिए कई उपाय किये। भरोसा कायम करने के लिए इस दौरान कई सेमिनार का आयोजन किया। इसमें कई नामी हस्तियों को भी बुलाया था। ताकि लोगों को लगे की कंपनी काफी बड़ी है। उसके संपर्क भी काफी रसूखदार लोगाें से है। कृषि कुंभ व मदर हुड केयर में कई लोगों को जोनल क्वाडिनेटर व जिला विक्रय अधिकारी, ब्लॉक क्वाडिनेटर के पद पर तैनात किया। उनसे कुछ दिन काम कराने के बाद वेतन नहीं दिया। इसके बाद सभी को नोटिस देकर निकाल दिया। इस गिरोह के देवेश मिश्रा व विनीत कुमार मिश्रा को पुलिस ने सचिवायल का फर्जी नियुक्ति पत्र देने के आरोप में अक्तूबर 2020 में गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने इन सभी आरोपियों केा इंदिरानगर थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश किया। जहां से जेल भेज दिया गया।