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रोजन अली को याद है पूरी राम कथा, रामलीला में बसती जान

Thu, 22 Oct 2015 03:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोहावल (फैजाबाद)
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फैजाबाद के सोहावल के अरथर गांव की राम लीला रोजन अली की जान बन चुकी है। बीते 21 वर्ष से वह रामलीला का मंचन कर निर्देशन करते आ रहे हैं। यही नहीं रोजन पात्रों का चयन करने से लेकर कलाकारों के वस्त्रों की डिजाइन करने, डायलाग और मंच पर प्रस्तुति की जिम्मेदारी स्वंय उठाते है।
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सामाजिक समरसता के प्रतीक बने रोजन को यहां हिन्दू-मुस्लिम एकता की रीढ़ माना जाता है। पेशे से टेलरिंग का काम करने वाले रोजन अली गांव की रामलीला को अपनी जान मानते है। आधुनिकता की दौड़ से अलग हटकर वास्तविकता दिखाने का इनका प्रयास रहता है।

हिन्दु धर्म से जुड़ सम्पूर्ण रामकथा रोजन को कंठस्थ है। समाज में बढ़ते धार्मिक विद्वेष के बावजूद रोजन को यहां हिन्दू-मुस्लिम एकता का रीढ़ माना जाता है। जिनके सहारे अरथर गांव की रामलीला बीते 21 वर्षों से सम्पन्न हो रही है।
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दीपावली और दशहरा भी मनाते हैं रोजन

दशहरा, दीपावली हो या मुहर्रम, ईद सभी त्यौहारों में रोजन की भागीदारी रहती है। साधारण परिवार में जन्में रोजन मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देते है। सामाजिक समरसता के पक्षधर हैं।

जाति, धर्म, भाषा व संस्कृति के आधार पर समाज को बांटने वालों को जवाब देने के लिए रोजन अली रामलीला के साथ एकांकी नाटकों का भी बीच-बीच में मंचन कराते है जो समाजिक एंव नैतिक मूल्यों पर आधारित होते हैं।

इस रामलीला के संयोजकों में शामिल सुरेश सिंह बाबा, जर्नादन गौड़, धूमप्रसाद, राममिलन, राकेशदूबे आदि ने बताया कि भाई चारे की प्रतीक गांव की इस रामलीला को सभी जाति धर्मों का समर्थन है। लोग आर्थिक खर्च को भी स्वेच्छा से उटाने के लिए उत्सुक रहते है। इस वर्ष रामलीला का मंचन 16 नवम्बर 2015 से शुरू होगा।
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