विश्व भर में आतंक पर्याय बने इबोला वायरस से लड़ने के लिए राजधानी में छह बेड का वार्ड तो आरक्षित कर दिया लेकिन डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए सेफ्टी किट उपलब्ध नहीं कराई है।
यदि कोई मरीज आया तो सिर्फ मास्क और ग्लब्स से ही संक्रमण से बचाव करना होगा। इस वायरस का संक्रमण मरीज के शरीर से होने वाले रक्तस्राव या फिर शरीर से ही निकले किसी अन्य स्राव से हो सकता है।
कभी-कभी वातारण में वायरस की मौजूदगी से भी संक्रमण होने की संभावना रहती है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक न तो स्वयं कोई व्यवस्था की है और न ही केंद्र सरकार से कोई मदद मिली है।
इबोला वायरस से संक्रमित को भर्ती करने के लिए लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में छह बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। एयरपोर्ट पर स्टाफ तैनात कर दिया गया है लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
जबकि बर्ड फ्लू और स्वाइन फ्लू जैसे पैनडेमिक के समय स्पेशल मास और किट की व्यवस्था की गई थी।
गौरतलब है कि सीएमओ डॉ. एस.एन.एस. यादव के निर्देश पर सोमवार से लोकबंधु राजनारायण अस्पताल में छह बेड इबोला से संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित किए गए थे।
एयरपोर्ट से पास होने के कारण कानपुर रोड पर स्थित इस अस्पताल को चुना गया है। मंगलवार को स्वयं सीएमओ ने एयरपोर्ट और लोकबंधु अस्पताल में जाकर इबोला से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया था।
उनका कहना है कि देश और प्रदेश में अभी इस वायरस के कोई संकेत नहीं मिले हैं लेकिन एहतियातन व्यवस्था की जा रही है। यदि एयरपोर्ट पर इस बीमारी से संबंधित लक्षणों वाला कोई यात्री मिलता है।
तो उसे तुरंत एयरपोर्ट से विशेष एंबुलेंस से लोकबंधु अस्पताल पहुंचाया जाएगा। वहां पूरी तरह से उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा।
अफ्रीकी देशों गुयाना, लाइबेरिया, सियेरा लियोन, नाइजीरिया से विश्व भर में फैल रहा इबोला वायरस वर्ष 1976 में पहली बार सूडान व रिपब्लिक ऑफ कांगो में मिले थे।
इबोला नदी के पास एक गांव में पहली बार इस वायरस का पता चला था। इस वजह से इसका नाम इबोला रखा गया था। हाल ही में वर्ष 2013 में गुयाना में इस बीमारी के केस पाए गए थे।