अगर आप और आपके बच्चे ठेले, खोमचे-दुकानों से भर-भर पेट फास्ट फूड आदि खाते हों तो जरा सावधान हो जाइए। बड़ी मात्रा में सड़े कद्दू, आलू और केमिकल से टोमैटो सॉस बनाया जा रहा है। इसमें टमाटर का नामो-निशान नहीं है। बच्चों और महिलाओं का पसंदीदा आमरस भी सड़े गुड़, मैदा, सड़ी खटाई और केमिकल से बनाया जा रहा है। इनमें हानिकारक लाल रंग भी मिलाया जा रहा है।
कोकोनट पेड़े में भी कोकोनट (गरी) नहीं बल्कि केमिकल डालकर बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। कानपुर में बर्रा पुलिस ने रविवार को जरौली गांव में मिलावटी खाद्य पदार्थों की दो फैक्ट्रियां पकड़ कर यह खुलासा किया है। दोनों फैक्ट्रियों से भारी मात्रा में मिलावटी आमरस, कोकोनट पेड़े के पैकेट और टोमैटो सॉस की बोतलें बरामद की गई हैं।
इंस्पेक्टर संतोष सिंह के मुताबिक आमरस फैक्ट्री का संचालक मौके से पकड़ा गया है, जबकि टोमैटो फैक्ट्री संचालक अतुल पाठक को बाद में दबोच लिया गया। खाद्य विभाग की टीम ने भी सैंपल भरे हैं।
एक सूचना पर शाम को बर्रा इंस्पेक्टर ने फोर्स के साथ जरौली गांव स्थित सुरेंद्र के मकान पर छापा मारा तो वहां भारी मात्रा में आमरस की पैकिंग व कोकोनट पेडे़ के पैकेट बरामद किए। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक जरौली निवासी गोपाल सिंह को मौके से ही पकड़ लिया।
फैक्ट्री में दो पैकिंग मशीनों के अलावा भारी मात्रा में कच्चा व तैयार माल बरामद किया गया है। गंदे फर्श पर मिलावटी आमरस सुखाने के लिए फैलाया गया था। चारों ओर इतनी गंदगी थी कि सांस लेना दूभर था। पुलिस ने खाद्य विभाग की टीम को भी बुला लिया।
बिना आम के ही बनाया जा रहा है आमरस
गोपाल की फैक्ट्री में कहीं पर भी आम व कोकोनट (गरी) का एक टुकड़ा तक नहीं मिला। आमरस तैयार करने के लिए लाल रंग का इस्तेमाल किया जाता था। इसके अलावा स्वाद खट्टा मीठा करने के लिए गंदगी से सनी सड़ी हुई सस्ती टाफी की भी मिलावट आमरस में होती थी। कोकोनट पेड़े भी केमिकल से बन रहे थे।
दोनों की पैकिंग में एक्सपायरी डेट भी नहीं है, सिर्फ जीएस गृह उद्योग ही लिखा हुआ है। गोपाल के ठीक बगल में अतुल पाठक की फैक्ट्री पर पुलिस के पहुंचते लेबर भाग खड़े हुए। पुलिस ने भीतर जाकर देखा तो भीषण गंदगी के बीच टोमैटो सॉस तैयार किया जा रहा था।
टोमैटो सॉस फैक्ट्री में टीम को एक भी टमाटर नहीं मिला। पता चला कि सड़े आलू व कद्दू से सॉस बनाया जाता है जिसमें बड़ी मात्रा में केमिकल और रंग भी मिलाया जाता था। फैक्ट्री में बदबू मारते आलू व कद्दू के ढेर लगे थे।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि दोनों फैक्ट्रियों में केमिकल और सड़ी गली चीजें इस्तेमाल की जा रही थीं, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक हैं। सभी चीजों के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है।
वहींगोपाल ने बताया कि माल की सप्लाई संगीत सिनेमा के पास स्थित थोक बाजार में भी किया करता था। गोपाल के साथ उसकी लेबर श्री किशन और ज्वाला भी पकड़े गए हैं। वहीं अतुल ने बताया कि तैयार मॉल को बोतलों में भरकर नौबस्ता, बिधनू, घाटमपुर और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में ठेले पर चाउमीन बेचने वालों को सप्लाई करता था।
स्कूलों के बाहर और फास्ट फूड ठेलों पर की जाती है सप्लाई
खाद्य विभाग की टीम की मानें तो मिलावटी आमरस और कोकोनट पेड़ा शहर के नौबस्ता, बर्रा, कर्रही, जरौली, योगेंद्र बिहार, गुजैनी, यशोदानगर, बिधनू, घाटमपुर, लालबंगला, जाजमऊ, शास्त्री नगर, विजय नगर, अशोक नगर आदि क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के बाहर की दुकानों व ठेलों पर सप्लाई किया जाता है।
गोपाल ने बताया कि उसके माल की सप्लाई शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी होती है। वह पिछले छह महीने से फैक्ट्री चला रहा था। मिलावटी सॉस की सप्लाई ठेलों, फुटपाथ पर फास्ट फूड की दुकानों पर की जाती है।
उल्टी, डायरिया, कैंसर, अल्सर तक हो सकतामिलावटी कैचअप और सॉस स्लो प्वाइजन की तरह शरीर के लिए घातक हो सकता है। इससे उल्टी, डायरिया से लेकर कैंसर, अल्सर तक हो सकता है।
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग की पूर्व हेड डॉ. आरती लाल चंदानी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि सस्ता कैचअप-सॉस तैयार करने के लिए सड़ी सब्जियों को और ज्यादा सड़ाया जाता है।
गाढ़ेपन के लिए उसमें सड़ा कद्दू, खराब लौकी, हानिकारक रंग, खट्टेपन के लिए केमिकल आदि डालते हैं। इसे खाने से डायरिया, उल्टियां, फूड प्वाइजनिंग, गेस्ट्रोइंट्राइटिस हो सकता है। स्किन एलर्जी, आंखों की एलर्जी, दमा से लेकर लिवर, किडनी फेल हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों में मिलाए जाने वाले केमिकल बहुत घातक होते हैं।