फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव: दक्षिण के चुनावी नेताओं के साथ उत्तर में व्यूह रचना करना चाहती है कांग्रेस, मिले कुछ ऐसे संकेत

Sat, 04 May 2024 06:56 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला संवाद, रायबरेली

सार

Lok Sabha Elections: उत्तर भारत की राजनीति में कांग्रेस पार्टी ऐसे प्रयोग कर सकती है जैसा उसने दक्षिण के राज्यों में किया है। तेलंगाना और कर्नाटक के मॉडल उत्तर भारत के राज्यों में भी लागू किए जा सकते हैं। 
 
विज्ञापन
राहुल गांधी के नामांकन में दिखे दक्षिण के नेता। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कांग्रेस इन दिनों दक्षिण के दो बड़े राज्यों कर्नाटक और तेलंगाना में सरकार में है। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस ने सत्ता में आने के लिए एक अलग तरह की स्ट्रैजी अपनाई। कांग्रेस कुछ वैसा ही यूपी सहित बाकी उत्तर के राज्यों के साथ कर सकती है। इस बात की झलक राहुल गांधी के नामांकन के साथ-साथ चुनावी रैलियों में दिए जाने वाले उनके भाषणों में दिखती है। 

विज्ञापन


शुक्रवार को रायबरेली में राहुल गांधी के नामांकन में  पहली बार गांधी परिवार के नामांकन काफिले में दक्षिण के कद्दावर चेहरे शामिल हुए। यह वह चेहरे हैं, जिन्होंने दक्षिण में कांग्रेस का किला मजबूत किया है। काफिले में प्रदेश कार्यकारिणी से कोई भी बड़ा चेहरा नजर नहीं आया। जो भी दिग्गज नेता रायबरेली आए वह गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद हैं। जिस तरह से दक्षिण के कांग्रेस नेता नामांकन में शामिल हुए, उससे कहीं न कहीं दक्षिण मॉडल के दांव-पेंच को चुनाव में आजमाए जाने की संभावना है।

रायबरेली का चुनाव इस बार कई मायने में खास होने जा रहा है। राहुल गांधी पहली बार पैतृक सीट से चुनाव मैदान में हैं। इस बार रायबरेली में कांग्रेस की रणनीति का पूरा सिजरा बिल्कुल नया होगा। एक तरह से राजनीति की पाठशाला में दक्षिण की चुनावी रणनीति को प्रयोगशाला में आजमाया जाएगा। असल में पिछले छह माह से रायबरेली में कांग्रेस से गांधी परिवार को किसी चेहरे को उतारने की पैरोकारी सबसे पहले दक्षिण के कांग्रेसी नेताओं ने की। उसी के बाद से दक्षिण के रणनीतिकार सक्रिय हो गए।
विज्ञापन


तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सबसे पहले रायबरेली से गांधी परिवार से ही लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कही थी। इसका कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने समर्थन किया था। शुक्रवार को नामांकन कराने के लिए जब राहुल गांधी मां सोनिया गांधी, बहन प्रियंका गांधी के साथ आए तो पहली बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पोल एक्सपर्ट सुनील कानूगोलू, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद रहे। वहीं तेलंगाना कांग्रेस कमेटी के कुछ पदाधिकारी भी शामिल हुए। इसने इस बात की ओर इशारा भी किया कि रायबरेली की राजनीतिक पाठशाला में दक्षिण की रणनीति का फार्मूला लगेगा।

खोई हुई जमीन को पाने की कोशिश 
असल में इसके पीछे यूपी में कांग्रेस की खोई जमीन को पाने के लिए कोशिश सरीखा देखा जा रहा है। पिछले बीस सालों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस ने जितने भी प्रयोग किए हैं। उसमें पार्टी को असफलता ही हाथ लगी है। केवल 2004 का लोकसभा चुनाव एक मैजिक सरीखा था, जिसमें कांग्रेस को लोकसभा में 20 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद से कांग्रेस प्रदेश में राजनीतिक जमीन को उपजाऊ बनाने की कोशिश करती रही, लेकिन हर प्रयोग असफल रहा। पिछले वर्ष तेलंगाना में जब कांग्रेस ने दक्षिण के चुनावी मॉडल पर काम कर सरकार बनाई तो दक्षिण के कद्दावर नेताओं का पार्टी में कद बढ़ा और इसके पीछे प्रियंका गांधी की सोच और उनके सुपर ग्रुप के रणनीतिकारों के दांव बहुत अधिक असरदार रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के रणनीतिकारों ने रायबरेली से दक्षिण के चुनावी मॉडल की रणनीति से व्यूह रचना तैयार करने का ब्लू प्रिंट तैयार किया है और इसके सफल होने पर रणनीति का प्रयोग प्रदेश के आगे आने वाले चुनावों में होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें