दुष्कर्म पीड़िता और उसके साथी को आत्महत्या के लिए उकसाने व षड्यंत्र रचने के आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई। पर, एडीजे पीएम त्रिपाठी ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। बसपा सांसद अतुल राय पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता और उसके साथी ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्महत्या का प्रयास किया था। इसमें दोनों बुरी तरह झुलस गए थे। बाद में इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।
सरकारी वकील मनोज त्रिपाठी ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ जांच रिपोर्ट आने के बाद 27 अगस्त को हजरतगंज थाने में एसएसआई दयाशंकर द्विवेदी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि दुष्कर्म के आरोपी अतुल राय को बचाने के लिए अमिताभ ठाकुर ने पैसे लेकर आपराधिक षड्यंत्र रचा था। साथ ही गवाहों को बदनाम करने व पीड़िता पर दबाव बनाने के लिए अपराधियों से जोड़कर छवि खराब करने के लिए ऑडियो वायरल किया था। इस मामले में पुलिस ने ठाकुर को उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था।
उधर, सीजेएम रवि कुमार गुप्ता ने उक्त मामले में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस टीम पर हमलावर होने व सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के आरोप में जेल से मंगलवार को तलब कर अमिताभ ठाकुर को न्यायिक हिरासत में 25 अक्तूबर तक के लिए जेल भेज दिया है। इस मामले में अमिताभ के साथ उनकी पत्नी नूतन ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही सत्र न्यायालय द्वारा स्वीकार की जा चुकी है। नूतन ठाकुर अभी अग्रिम जमानत पर हैं।