प्रदेश के कुछ लोगों के एक ग्रुप अवैध असलहे इकट्ठा कर रहा है और देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा व संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए योजना बना रहे हैं।
एटीएस के विशेष न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्ता ने विभिन्न शहरों में आतंकी घटनाओं के लिए हथियार जमा करने और देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा व संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने वालों को मंगलवार को पांच-पांच साल के कठोर कारावास और 14-14 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। मामले में एहतेशामूल हक उर्फ मिंटू उर्फ अरबान, मो फैजान उर्फ मुफ्ती, मो नाजिम उर्फ उमर और मुजम्मिल उर्फ जीशान को सजा सुनाई गई है।
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कोर्ट में सरकारी वकील ने बताया कि मामले के वादी एटीएस के निरीक्षक अविनाश ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया है कि प्रदेश के कुछ लोगों के एक ग्रुप अवैध असलहे इकट्ठा कर रहा है और देश की अखंडता, एकता, सुरक्षा व संप्रभुता को नुकसान पहुंचाने के लिए किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए योजना बना रहे हैं। जानकारी इकट्ठा करने पर पता चला कि 7 से 10 लोगों का एक गिरोह उमर, गाजी बाबा, मुफ्ती, सलमान, निजाम, अब्दुल्ला और राशिद शामिल हैं, जो देश के विभिन्न शहरों में रहकर षड्यंत्र के तहत आम जनता पर अवैध हथियारों और बमों से हमला करने की योजना बना रहे हैं।
मामले की विवेचना करने के बाद शेषमणि उपाध्याय ने एहतेशामूल, फैजान, नाजिम, मुजम्मिल के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दायर की। इन लोगों ने सुनवाई के दौरान माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि सभी गरीब परिवार के हैं और उनके अलावा उनके परिवार की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उनसे गलती हो गई है। उन्होंने कोर्ट को लिखित में बताया कि आगे वह ऐसी गलती नहीं करेंगे।