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जिंदा मरीज को मृत बता वेंटिलेटर से हटाया, तीमारदारों और स्टॉफ के बीच जमकर मारपीट

Thu, 17 May 2018 12:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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बीमार बुजुर्ग महिला को लेकर परेशान रहे तीमारदार - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ में हसनगंज के डालीगंज स्थित जेनिथ अस्पताल में मंगलवार देर रात बुजुर्ग मरीज को मृत बताकर वेंटिलेटर से हटाने पर जमकर हंगामा हुआ। परिवार जब मरीज को मृत समझकर ले जाने लगा तो सांसें चलती मिलीं। इस पर तीमारदारों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
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डॉक्टर ने विरोध किया तो वहां पर मारपीट हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से मरीज को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया है, वहां मरीज को वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया है। नाका गणेशगंज की रहने वाली केवला (70) को सांस लेने में तकलीफ होने पर परिवारीजनों ने करीब पांच दिन पहले नाका स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।

महिला मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत बताते हुए तीन दिन पहले डॉक्टरों ने जेनिथ हॉस्पिटल रेफर कर दिया। डॉ. आदिल ने मंगलवार रात मरीज को मरा बताकर वेंटिलेटर से हटा दिया। तीमारदार शव ले जाने के लिए वाहन बुलाया। इसी बीच मरीज के शरीर में हरकत देखा। तीमारदारों ने डॉक्टर से सांस चलने की बात कही तो डॉक्टर ने दोबारा चेक किया तो वह जिंदा थी।
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घटना से आक्रोशित तीमारदारों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हंगामा किया। अस्पताल स्टाफ तीमारदारों से अभद्रता करने लगे। इसे लेकर अस्पताल में मारपीट भी हुई। मामले की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई।

इलाज नहीं वसूली कर रहे निजी अस्पताल

बीमार बुजुर्ग महिला - फोटो : amar ujala
मौके पर आई पुलिस ने तीमारदारों को समझाकर शांत कराया। मरीज को एंबुलेंस बुलाकर ट्रॉमा सेंटर भेजा। वहां पर मरीज को बुधवार दोपहर करीब दो बजे क्रिटिकल केयर यूनिट में वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि महिला मरीज की हालत गंभीर है।

मरीज के पति चमन लाल मोंगा ने बताया कि जेनिथ हॉस्पिटल में करीब 60 घंटे तक भर्ती रहने दौरान डॉक्टरों ने दवाएं, वेंटिलेटर शुल्क मिलाकर 80 हजार रुपये वसूल लिया। अस्पताल मोटा बिल वसूलने के लिए लगे थे। पति का कहना है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती है, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई।

पति ने बताया कि रात करीब दो बजे डॉक्टर ने जिंदा मरीज को मृत घोषित किया था। शरीर में हरकत देख दबाव बनाया गया तो उसने सीनियर डॉक्टर को कॉल किया, लेकिन कोई भी डॉक्टर नहीं आया। इतना ही नहीं सीनियर डॉक्टरों ने अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। 

मरीज के दामाद अनिल ने बताया कि निजी अस्पतालों का पूरा रैकेट फैला हुआ है। अस्पतालों से मरीज इलाज के लिए नहीं, बल्कि वसूली के लिए ठेके पर भेजे जाते हैं। नाका के निजी अस्पताल से ट्रॉमा सेंटर भेजने की बजाय बेहतर इलाज का झांसा देकर जेनिथ अस्पताल ठेल दिया गया। इस दौरान निजी अस्पताल को मरीज भेजने के नाम पर रुपये भी लिए हैं।
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देखें, यहां भी हुई थी लापरवाही

- फोटो : डेमो
यहां भी हुई थी लापरवाही
- केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों ने जिंदा बुजुर्ग महिला को मृत घोषित किया था
- सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में तीन साल पहले जिंदा मरीज को मरा बताकर दौड़ाते रहे डॉक्टर
- गुडंबा के निजी अस्पताल में जिंदा मरीज को मरा बताया गया था 

बुजुर्ग महिला मरीज को वेंटिलेटर यूनिट में शिफ्ट करा दिया गया है। उनकी खून समेत अन्य जांचें कराई जा रही हैं। पल्मोनरी क्रिटिकल केयर के डॉक्टरों से इलाज में मदद ली जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार मरीज की मॉनीटरिंग कर रही है। - डॉ. संदीप तिवारी, प्रभारी, केजीएमयू, ट्रॉमा  

मरीज को ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया था। इसके लिए अस्पताल का भी स्टाफ भी साथ गया था। मरीज के इलाज में कोई भी लापरवाही नहीं र्हुई। तीमारदारों के ये आरोप बेबुनियाद हैं कि मरीज को मृत घोषित कर दिया गया था। तीमारदारों ने अस्पताल का अभी बकाया बिल भी नहीं चुकाया है। - डॉ. शरद, निदेशक, जेनिथ अस्पताल 
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