विश्लेषकों का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव के बाद सपा से गठबंधन टूटने पर आगामी एमएलसी चुनावों में सपा के खिलाफ भाजपा या अन्य किसी भी पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिलाने का खुला एलान कर अपनी भविष्य की रणनीति का संकेत कर दिया था।
आगामी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी की रणनीति उसी घोषणा पर आगे बढ़ने के रूप में देखा जाना चाहिए। यानी कि जहां बसपा जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव खुद नहीं जीत सकती वहां बसपा सदस्यों को सपा प्रत्याशियों को हराने वाले किसी भी दल के प्रत्याशी को वोट का विकल्प दिया जा सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि बसपा की इस रणनीति का ज्यादा फायदा भाजपा को हो सकता है।
हालांकि किस जिले में किस प्रत्याशी को समर्थन दिया जाए, इसका फैसला स्थानीय स्तर पर मुख्य जोन इंचार्ज जिला यूनिट से बात कर करेंगे। ऐसे में वास्तविक रूप से इस रणनीति का क्या असर हुआ यह चुनाव बाद ही पता चल सकेगा।