कानपुर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे आजम खां ने एक सवाल पर ऐसा जवाब दिया कि वह फिर सुर्खियों में आ गए।
आजम का कहना है कि वह चाहते हैं कि नाथूराम गोडसे को भारतरत्न मिले। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि ताजमहल तोड़कर गोडसे का मंदिर बनवा दिया जाए।
दरअसल बीते दिनों गोडसे को गांधी से बड़ा देशभक्त बताते हुए हिंदू महसभा ने गोडसे का मंदिर बनवाने की घोषणा की थी।
इस घोषणा के बाद हिंदू महासभा की योजना पर आजम से प्रतिक्रिया मांगी गई। भड़के आजम खां ने तंज कसा कि इन संगठनों को तो देश के हर कोने में गोडसे का मंदिर बनवाना चाहिए। गुस्साए आजम बोले, अगर ताजमहल तोड़कर गोडसे का मंदिर बनाया जाता तो भी उन्हें कोई ऐतराज नहीं होगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक मंदिर के बावत पूछे गए एक सवाल पर आजम खां का जवाब था, ‘बापू की हत्या करने वाले गोडसे का मंदिर तो देश के हर जिले में बनना चाहिए। किसी को भी ऐतराज नहीं होगा।
मैं तो चाहता हूं कि गोडसे को भारतरत्न मिले। वैसे तो मस्जिद तोड़कर मंदिर नहीं बनाया जाना चाहिए पर गोडसे के मंदिर के लिए अगर ताजमहल तोड़कर ऐसा किया गया तो कोई मना नहीं करेगा।’
क्या है हिंदू संगठनों की योजना
बीते दिनों हिंदू संगठनों ने घोषणा की थी कि गोडसे के इस मंदिर का निर्माण उसी दिन शुरू होगा, जिस दिन उसने बापू को गोली मारी थी।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने ये घोषणा की कि गांधी के हत्यारे गोडसे का मंदिर लखनऊ के पास सीतापुर शहर में बनवाया जाएगा।
इस मंदिर के लिए सिधौली के पारा गांव में जमीन भी खरीद ली गई है। इसी जमीन पर 30 जनवरी से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। एक खबर के मुताबिक इस मंदिर में रखने के लिए गोडसे की अस्थियों के कलश को पुणे से सीतापुर लाया जाएगा।
हिंदू महासभा के प्रवक्ता शरद गुप्ता ने बताया कि गोडसे के इस कलश को बकायदा कलश यात्रा के जरिए मंगवाया जाएगा। ये कलश गोडसे की रिश्तेदार हिमानी सावरकर के पास है।
‘गांधी से बड़ा देशभक्त था गोडसे’
हिंदू महासभा ने ही कुछ दिन पहले ये बयान दिया था कि नाथूराम गोडसे गांधी से भी बड़ा देशभक्त था। गोडसे ने गांधी जी की हत्या सिर्फ इसलिए की थी क्योंकि उन्होंने भारत का विभाजन करवाया था। हालांकि इस महासभा के इस बयान ने विवाद का रूप भी ले लिया।
गोडसे की प्रतिमा लगवाने को लेकर भी पिछले कुछ दिनों से राजनीति चल रही है। नाथूराम गोडसे की प्रतिमा लगाने की मांग पर हिन्दू महासभा के दोनों गुटों में ठन गई थी।
एक गुट का कहना है कि प्रतिमा लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए, जबकि दूसरे गुट का कहना है कि इस तरह की मांग उठाना समाज में कटुता को बढ़ावा देगा और इससे गलत संदेश जाएगा।
एक गुट के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी का दावा था कि उनका गुट ही असली हिन्दू महासभा है। उन्होंने गोडसे के प्रचार के लिए दूसरे गुट के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश कौशिक की आलोचना की थी। चक्रपाणी ने कहा कि चंद्रप्रकाश सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा कर रहे हैं।