प्रदेश सरकार एलोपैथी फार्मासिस्टों की तर्ज पर अब आयुर्वेद व यूनानी फार्मासिस्टों की मेरिट के आधार पर भर्ती करेगी।
दरअसल आयुर्वेद व यूनानी फार्मासिस्ट भर्ती नियमावली नहीं होने के चलते खाली पदों पर इनकी भर्ती नहीं हो पा रही थी। सरकार ने मेरिट के जरिये इनकी नियुक्ति के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
प्रदेश में आयुर्वेद व यूनानी फार्मासिस्टों के करीब 600 पद खाली हैं। जबकि प्रदेश में 800 से अधिक आयुर्वेद व यूनानी के प्रशिक्षित फार्मासिस्ट बेरोजगार हैं।
काफी दिनों से प्रदेश में भर्ती न होने के कारण प्रशिक्षित फार्मासिस्ट कुछ महीने पहले कोर्ट की शरण में चले गए। जहां से उन्हें राहत मिल गई।
कोर्ट ने कहा कि जिस तरह एलोपैथी के फार्मासिस्टों की नियुक्ति की जाती है, उसी तरह इनकी भी नियुक्ति की जाए। दरअसल इससे पहले एलोपैथी फार्मासिस्टों ने भी भर्ती के लिए हाई कोर्ट का सहारा लिया था।
उस वक्त कोर्ट ने कहा था कि प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की भर्तियां मेरिट के आधार पर की जाएं। इस फैसले के बाद आयुर्वेद व यूनानी फार्मासिस्टों ने भी कोर्ट की शरण ली।
अब सरकार न्यायालय के आदेशों के तहत आयुर्वेद व यूनानी फार्मासिस्टों की भर्ती करने जा रही है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मेरिट से भर्ती करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।
डिमॉन्स्ट्रेटर होंगे चिकित्सा सेवा संवर्ग में शामिल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात डिमॉन्स्ट्रेटरों को चिकित्सा सेवा संवर्ग में शामिल किया जाएगा। अखिलेश यादव की कैबिनेट ने मंगलवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रस्ताव पास होने से अब इन्हें भी असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के पदनाम मिल जाएंगे।
इसमें उन्हीं लोगों को लाभ मिलेगा, जिनकी नियुक्ति जुलाई 1998 में हुई थी। डिमॉन्स्ट्रेटर मेडिकल कॉलेजों की प्रयोगशालाओं में फिक्स वेतन पर रखे जाते हैं।