प्रो. अपजित कौर खुद ऑक्यूलोप्लास्टी विशेषज्ञ हैं। ऐसे में नई व्यवस्था के संचालन में कोई दिक्कत नहीं आएगी। केजीएमयू प्रशासन ने रणनीति बनाई है कि कुछ समय के लिए संविदा पर दो ऑक्यूलिस्ट रखे जाएंगे। वे मौजूद ऑप्टोमेट्रिस्ट को प्रशिक्षित करेंगे।
इससे केजीएमयू में आर्टिफिशियल आंखें बनाने का काम आसान हो जाएगा। इसके लिए विभाग में कुछ उपकरण आ गए हैं, जबकि अन्य जल्द मंगाने की तैयारी है।
बनावटी आंखें तैयार करने के लिए संबंधित मरीज की आंखों को स्कैन कर लिया जाता है। फिर उसके आकार के आधार पर नकली पुतली तैयार की जाती है। फिर उसे पीड़ित में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसमें ठीक आंख की पुतली के रंग की ही नकली पुतली तैयार की जाती है।
आर्टिफिशियल आइरिस एंड लेंस इम्प्लेसमेंट से ठीक आंख से हूबहू मिलान करा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए विशेष प्रकार के पदार्थ प्रयोग किए जाते हैं। फिर उनमें कुछ रसायन मिलाकर निर्धारित सांचे में ढाल लिया जाता है। आंखें बनाने में खास पत्थर का भी इस्तेमाल होता है।