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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई आपत्ति : विवाह के लिए आयु का निर्धारण समाज के लिए हानिकारक

Tue, 21 Dec 2021 10:56 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

बोर्ड ने सरकार से विवाह की आयु तय न करने का अनुरोध किया है। 
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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विवाह के लिए लड़कियों की 21 वर्ष आयु तय करने के सरकार की तैयारी को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने समाज के लिए हानिकारक बताया है। बोर्ड ने सरकार से विवाह की आयु तय न करने का अनुरोध किया है। 

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बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि विवाह मानव जीवन की अहम जरूरत है, लेकिन यह कब हो, इसके लिए किसी नियत आयु को मानक नहीं बनाया जा सकता है। विवाह का संबंध स्वास्थ्य के साथ ही समाज में नैतिक मूल्यों की सुरक्षा से भी है। यही वजह है कि किसी भी धर्म में विवाह की कोई आयु तय नहीं की गई, बल्कि इसे उस धर्म के मानने वालों के विवेक पर छोड़ा गया है। 

उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है जब तय आयु से पहले विवाह करने में लड़की का हित होता है। ऐसे में सरकार का यह कदम समाज के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। अगर कोई लड़का या लड़की 21 साल से पूर्व विवाह की जरूरत महसूस करता है और वह विवाह बाद के दायित्व का निर्वहन करने में सक्षम है तो उसको विवाह से रोकना अत्याचार और वयस्क व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप है। इससे समाज में अपराध को बढ़ावा मिल सकता है। 

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