कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन के खतरे ने हज आवेदन की रफ्तार धीमी कर दी है। आवेदन शुरू हुए डेढ़ महीना हो गए हैं, लेकिन प्रदेश के हज कोटे की सीटों का 10 फीसदी भी आवेदन नहीं हुए हैं। अब तक पूरे प्रदेश से मात्र 2699 लोगों ने ही आवेदन किया है।
कोरोना संक्रमण फैलने से पूर्व वर्ष 2019 में यूपी का हज कोटा करीब 32 हजार सीटों का था। लेकिन, कोरोना के चलते 2020 व 2021 की हज यात्रा निरस्त कर दी गई थी। सेंट्रल हज कमेटी ने अब तक प्रदेश के कोटे की सीटों का निर्धारण नहीं किया है। लेकिन प्रदेश को बीते सालों में हज कोटे की 32 से 34 हजार सीटें मिलती रही हैं। इस हिसाब से अब तक संभावित हज कोटे की सीटों का 10 फीसदी भी आवेदन नहीं हुआ है। इस संबंध में राज्य हज कमेटी के सचिव राहुल गुप्ता ने कहा कि हज आवेदन की अतिम तिथि 31 जनवरी है। बचे दिनों में आवेदन की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है।
आवेदन शुल्क रिफंड न होना भी वजह
हज यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय आवेदकों को 300 रुपये शुल्क जमा करना होता है। पिछले दो सालों में हज यात्रा निरस्त होने के बाद आवेदकों को कोई पैसा वापस नहीं किया गया। आवेदन शुल्क रिफंड न होना भी इस सुस्त रफ्तार की वजह मानी जा रही है।
नियमित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी नहीं हो रहीं
ओमीक्रॉन के बढ़ते खतरे को देखते हुए नियमित अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी अब तक नहीं चालू हुई हैं। सऊदी अरब सहित खाड़ी के देशों की उड़ाने कब से शुरू होंगी इसकी भी कोई सूचना नहीं है। वहीं, सऊदी अरब सरकार ने भी हज को लेकर कोई दिशा- निर्देश अब तक नहीं जारी किए हैं। इससे भी लोग हज यात्रा को लेकर आशंकित हैं।